बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर पर भाग लेने वाले खिलाड़ियों के व्यक्तित्व एवं समायोजन का तुलनात्मक अध्ययन

 

दुलीचन्द महला1*, डॉ. दिवेश चौधरी 2

1 शोध छात्र, शारीरिक शिक्षा विभाग, आई.आई.एम.टी. विश्वविद्यालय, मेरठ, (यूपी)

duleechandmahala@gmail.com

2 आचार्य, शारीरिक शिक्षा विभाग, आई.आई.एम.टी. विश्वविद्यालय, मेरठ, (यूपी)

सार: प्रस्तावनाः अध्ययन का मुख्य उद्देश्य चैधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ व माँ शाकुम्भरी देवी विश्वविद्यालय, सहारनपुर के बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर पर भाग लेने वाले खिलाड़ियों के व्यक्तित्व और समायोजन अध्ययन करना था। अध्ययन का एक अन्य उद्देश्य अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल के खिलाड़ियों के व्यक्तित्व और समायोजन अध्ययन करना था। तरीकाः अध्ययन के लिए कुल 240 खिलाड़ियों (120 बास्केटबॉल व 120 वॉलीबॉल) का चयन चैधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ व माँ शाकुम्भरी देवी विश्वविद्यालय, सहारनपुर के विभिन्न महाविद्यालयों से अन्तरमहाविद्यालयी स्तर पर भाग लेने वाले बास्केटबॉल व वॉलीबॉल के सत्र 2023-24 में प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ियों का यादृच्छिक रूप से चुना गया था। व्यक्तित्व को मापने हेतु आर0बी0 कैटेल द्वारा निर्मित 16 व्यक्तित्व परीक्षण का प्रयोग किया गया और समायोजन को मापने हेतु ए॰के॰पी॰ सिन्हा व आर॰पी॰ सिंह द्वारा निर्मित ‘एडजस्टमेंट इन्वेंट्री फॉर कॉलेज स्टूडेन्ट’ का प्रयोग किया गया है। विषयों की आयु 17 से 25 वर्ष के बीच थी। बास्केटबॉल व वॉलीबॉल के खेल के खिलाड़ियों के बीच व्यक्तित्व और समायोजन के तुलनात्मक अध्ययन के लिए टी-टेस्ट का प्रयोग किया गया। परिकल्पनाओं के परीक्षण के लिए महत्व का स्तर 0.05 निर्धारित किया गया था। परिणाम और चर्चाः अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के बास्केटबॉल एवं वॉलीबॉल खिलाड़ियों के व्यक्तित्व और समायोजन में तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर स्पष्ट होता है कि बास्केटबॉल एवं वॉलीबॉल खिलाड़ियों के बीच व्यक्तित्व की तुलना करने पर (चढण्05) सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण अन्तर पाया गया था, जबकि बास्केटबॉल एवं वॉलीबॉल खिलाड़ियों के बीच समायोजन की तुलना करने पर (चझण्05) सांख्यिकीय रूप से कोई महत्वपूर्ण अन्तर नहीं पाया गया था।

मुख्य शब्दः बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, अन्तरमहाविद्यालयी खिलाड़ी, व्यक्तित्व और समायोजन

प्रस्तावना

शिक्षा मनोविज्ञान को सदैव से ही समाज तथा राष्ट्र की प्रगति के एक महत्वपूर्ण तथा शक्तिशाली साधन के रूप में स्वीकार किया जाता है। यही कारण है कि प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक सदैव ही शिक्षा मनोविज्ञान को सामाजिक तथा राष्ट्रीय विकास की दृष्टि से एक सम्मानजनक स्थान दिया जाता रहा है। प्राचीन काल में शिक्षा मनोविज्ञान का स्वरूप अत्यंत संकुचित तथा एकाकी था। उस समय शिक्षा मनोविज्ञान को सूचनाएं प्राप्त करने तक सीमित माना जाता था। छात्रों और खिलाड़ियों की आवश्यकताओं, परिस्थितियों, क्षमताओं, रुचियों आदि का शिक्षा प्रक्रिया में कोई स्थान नहीं था। शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने का श्रेय मनोविज्ञान को दिया जाता है। शिक्षा में मनोविज्ञान के प्रवेश के फलस्वरूप शिक्षा के क्षेत्र में मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति का उद्भव हुआ। मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति ने शिक्षा को बाल केन्द्रित बनाने के साथ-साथ शैक्षिक समस्याओं का समाधान खोजने में मनोवैज्ञानिक सिद्धान्तों का अधिकाधिक प्रयोग करने का प्रयास किया। मनोविज्ञान ने बालकों की प्रकृति को समझने में सहायता प्रदान की, जिसके फलस्वरूप माता-पिता, अध्यापकगण तथा प्रशासक तंत्र सीखने-सिखाने की प्रक्रिया को सरल, सुगम तथा प्रभावशाली बनाने में सफल होते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में मनोविज्ञान के ज्ञान के बढ़ते प्रयोग के फलस्वरूप शिक्षा प्रक्रिया मे संलग्न व्यक्तियो के लिए मनोविज्ञान के तथ्यो, सिद्धान्तो तथा अनुप्रयोगो का अध्ययन करना अपरिहार्य हो गया है। शिक्षा के क्षेत्र मे मनोविज्ञान के अध्ययन की आवश्यकता ने शिक्षा मनोविज्ञान नामक एक नये विषय को जन्म दिया। (कमलेश, एम0एल0, 1998)[1]

खेल अनेकार्थक संज्ञा है। प्रत्येक व्यक्ति के लिए खेल का अर्थ एवं परिभाषा भिन्न होते हैं। जहाँ फ्रोवेल ने खेल को “बालक के रोही पत्रो का स्वाभाविक उद्ज्जन बताया है।“ मेकडूगल का विश्वास हे कि खेल “जीव के संरक्षण बुद्धि तथा विकास के लिए नितान्त आवश्यक है। रसकिन की दृष्टि से बिना किसी निर्दिष्ट उद्देश्य के मन तथा तन की आनन्ददायिनी प्रक्रिया खेल है।“ गुलिक ने कहा कि “स्वच्छन्द होकर हम जो कुछ और जैसा भी करना चाहे, वह खेल ही होगा।” लैजारस ने “खेल को अपने आप में एक मुक्त, निरूद्देश्य, अनुरंजन, व्यपर्वतनीय प्रक्रिया” बताया है। (एडरमैन आर0 बी0, 1974)[2]

व्यक्ति के व्यक्तित्व से तात्पर्य हमारे व्यक्तित्व और व्यवहार के उन गुणों एवं विशेषताओं से है जिनके आधार पर हमारे व्यक्तित्व की पहचान होती है। एक व्यक्ति का व्यवहार दूसरे से किस प्रकार भिन्न है यह उन व्यक्तियों के व्यक्तित्व गुणों के आधार पर ही कहा जाता है। कुछ व्यक्ति बहुत शान्त, शर्मीले और डरपोक प्रवृति के होते हैं, दूसरे बहुत उग्र, अधिक खुले हुए तथा निडर प्रकृति के होते हैं। किसी भी अवस्था में व्यक्ति के व्यक्तित्व के आन्तरिक पक्ष की अवहेलना नहीं की जा सकती। व्यक्तित्व में व्यक्ति के व्यवहार का समग्र रूप सामने आता है।

व्यक्तित्व, एक विशिष्ट दृष्टिकोण, भावना और कार्य-पद्धति है। व्यक्तित्व में मनोवृत्ति, मानसिकता और भावनाएँ शामिल होती हैं और यह दूसरों के साथ सहयोग में सबसे स्पष्ट रूप से व्यक्त होता है। इसमें जन्मजात और अर्जित दोनों प्रकार के आचरण गुण शामिल होते हैं, जो एक व्यक्ति को दूसरे से अलग करते हैं और जिन्हें व्यक्ति के वातावरण और समूह के साथ संबंधों में देखा जा सकता है। (अंकुर, 2023)[3]

एक प्रक्रिया के रूप में समायोजन उन मनोवैज्ञानिकों के लिए विशेष रुचि का विषय है जो किसी व्यक्ति और उसके व्यवहार को समझना चाहते हैं। किसी भी समय व्यक्ति अपने बाहरी वातावरण के साथ जिस तरह से खुद को समायोजित करता है, वह उसके विकास में जैविक कारकों और उसके सामाजिक अनुभवों के बीच परस्पर क्रिया पर निर्भर करता है। ’समायोजन’ शब्द का शाब्दिक अर्थ है, अनुकूल बनाना, उचित बनाना, समायोजित करना, व्यवस्थित करना, बदलना, मिलाना या रिपोर्टर बनाना। इसलिए, जब हम दो चीजों के बीच समायोजन करते हैं, तो हम उनमें से एक या दोनों को एक दूसरे से तुलना करने के लिए समायोजित या परिवर्तित करते हैं। कुछ परिस्थितियों में, चरों में से एक परिवर्तनीय नहीं हो सकता है, इसलिए जो परिवर्तनीय है, उसे एक दूसरे के अनुकूल बनाने के लिए इधर-उधर समायोजित किया जाना चाहिए। समायोजन शब्द व्यक्ति और पर्यावरण के बीच एक सौहार्दपूर्ण जुड़ाव का संकेत देता है। सामंजस्य का स्तर दो चीजों पर निर्भर करता है, पहला व्यक्ति के अंदर की निश्चित संभावना और दूसरा वातावरण का चरित्र। एक व्यक्ति तब परिवर्तित हुआ कहा जाता है जब वह पर्याप्त रूप से पर्याप्त वातावरण से इतना जुड़ा होता है कि वह आम तौर पर आनंदित, उत्पादक होता है और उसमें सामाजिक झुकाव का स्तर होता है। उसे एक विशेष गतिविधि में शामिल होना चाहिए, लेकिन कभी-कभी यह अनुशासनहीनता और कुछ मामलों में असामाजिक अभिव्यक्तियाँ भी पैदा करता है। घर और स्कूल में अपर्याप्त समायोजन छात्र को विकृति और बाल अपराध की ओर ले जाता है। बच्चों और किशोरों को घर, स्कूल और समाज में अलग-अलग समस्याओं का सामना करना पड़ता है। (कुमार पी. और गुर्जर एम.एस., 2016)[4]

कार्यप्रणाली

अध्ययन के लिए कुल 240 खिलाड़ियों (120 बास्केटबॉल व 120 वॉलीबॉल) का चयन चैधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ व माँ शाकुम्भरी देवी विश्वविद्यालय, सहारनपुर के विभिन्न महाविद्यालयों से अन्तरमहाविद्यालयी स्तर पर भाग लेने वाले बास्केटबॉल व वॉलीबॉल के सत्र 2023-24 में प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ियों का यादृच्छिक रूप से चुना गया था। व्यक्तित्व को मापने हेतु आर0बी0 कैटेल द्वारा निर्मित 16च्थ् व्यक्तित्व परीक्षण का प्रयोग किया गया और समायोजन को मापने हेतु ए॰के॰पी॰ सिन्हा व आर॰पी॰ सिंह द्वारा निर्मित ‘एडजस्टमेंट इन्वेंट्री फॉर कॉलेज स्टूडेन्ट’ का प्रयोग किया गया है। विषयों की आयु 17 से 25 वर्ष के बीच थी। बास्केटबॉल व वॉलीबॉल के खेल के खिलाड़ियों के बीच व्यक्तित्व और समायोजन के तुलनात्मक अध्ययन के लिए टी-टेस्ट का प्रयोग किया गया। परिकल्पनाओं के परीक्षण के लिए महत्व का स्तर 0.05 निर्धारित किया गया था।

अध्ययन के परिणाम

बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल खेलों के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों के व्यक्तित्व के वर्णनात्मक आंकड़ों को सारणी संख्या-1 में प्रस्तुत किया गया।

सारणी 1: बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल खेलों के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों के व्यक्तित्व के वर्णनात्मक आंकड़े

वर्णनात्मक आँकड़े

बास्केटबॉल खेल के खिलाड़ी

वॉलीबॉल खेल के खिलाड़ी

मध्य

45.81

46.78

मानक विचलन

3.90

2.90

रेंज

35

13

न्यूनतम

19

40

अधिकतम

54

53

 

सारणी संख्या-1 के अवलोकन से ज्ञात होता है कि बास्केटबॉल खेल के खिलाड़ियों के व्यक्तित्व का मध्य 44.81 था, जबकि वॉलीबॉल खेल के खिलाड़ियों के व्यक्तित्व का मध्य 46.78 था। यह तालिका वॉलीबॉल खेल के खिलाड़ियों के व्यक्तित्व का मानक विचलन 3.90 दिखाती है, जबकि वॉलीबॉल खेल के खिलाड़ियों के व्यक्तित्व के लिए मानक विचलन 2.90 था। यह तालिका बास्केटबॉल खेल के खिलाड़ियों के व्यक्तित्व की रेंज मूल्य 35 दिखाती है, जबकि वॉलीबॉल खेल के खिलाड़ियों के व्यक्तित्व का रेंज मूल्य 13 था। तालिका यह भी दोहराती है कि बास्केटबॉल खेल के खिलाड़ियों के व्यक्तित्व का न्यूनतम मूल्य 19 था, जबकि वॉलीबॉल खेल के खिलाड़ियों के व्यक्तित्व का न्यूनतम मूल्य 40 था। यह तालिका बास्केटबॉल खेल के खिलाड़ियों के व्यक्तित्व का अधिकतम मूल्य 54 दिखाती है, जबकि वॉलीबॉल खेल के खिलाड़ियों के व्यक्तित्व का अधिकतम मूल्य 53 था।

बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल खेलों के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों के बीच व्यक्तित्व के स्तर का पता लगाने के लिए, टी-टेस्ट सांख्यिकी का उपयोग किया गया और उसको सारणी संख्या-2 में प्रस्तुत किया गया।

सारणी 2: बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल खेलों के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों के बीच व्यक्तित्व के स्तर का टी-अनुपात

खेल

टी-अनुपात

 

बास्केटबॉल खेल के खिलाड़ी

वॉलीबॉल खेल के खिलाड़ी

-2.197’

मध्य

45.81

46.78

मानक विचलन

3.90

2.90

सार्थकता का स्तर = .05

स्वतंत्रता की डिग्री 238 पर सार्थक होने के लिए आवश्यक टी-मान = 1.96

सारणी संख्या-2 के अवलोकन से ज्ञात होता है कि व्यक्तित्व के संबंध में बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल खेलों के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों के औसत स्कोर के बीच सार्थक अंतर पाया गया क्योंकि टी-अनुपात -2.197 पाया गया। यह सार्थकता के स्तर .05 पर आवश्यक मान से अधिक था।

यह चित्र संख्या-1 में दर्शाया गया है।

चित्र 1 में बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल खेलों के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों के बीच व्यक्तित्व के अन्तर को दर्शाया गया है।

बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल खेलों के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों के समायोजन के वर्णनात्मक आंकड़ों को सारणी संख्या-3 में प्रस्तुत किया गया।

सारणी 3: बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल खेलों के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों के समायोजन के वर्णनात्मक आंकड़े

वर्णनात्मक आँकड़े

बास्केटबॉल खेल के खिलाड़ी

वॉलीबॉल खेल के खिलाड़ी

मध्य

45.63

45.70

मानक विचलन

2.83

2.26

रेंज

11

19

न्यूनतम

40

32

अधिकतम

51

51

 

सारणी संख्या-3 के अवलोकन से ज्ञात होता है कि बास्केटबॉल खेल केे खिलाड़ियों के समायोजन का मध्य 45.63 था, जबकि वॉलीबॉल खेल के खिलाड़ियों का समायोजन का मध्य 45.70 था। यह तालिका वॉलीबॉल खेल के खिलाड़ियों के समायोजन का मानक विचलन 2.83 दिखाती है, जबकि वॉलीबॉल खेल के खिलाड़ियों के समायोजन के लिए मानक विचलन 2.26 था। यह तालिका बास्केटबॉल खेल के खिलाड़ियों के समायोजन की रेंज मूल्य 11 दिखाती है, जबकि वॉलीबॉल खेल के खिलाड़ियों के समायोजन का रेंज मूल्य 19 था। तालिका यह भी दोहराती है कि बास्केटबॉल खेल के खिलाड़ियों के समायोजन का न्यूनतम मूल्य 40 था, जबकि वॉलीबॉल खेल के खिलाड़ियों के समायोजन का न्यूनतम मूल्य 32 था। यह तालिका बास्केटबॉल खेल के खिलाड़ियों के समायोजन का अधिकतम मूल्य 51 दिखाती है, जबकि वॉलीबॉल खेल के खिलाड़ियों के समायोजन का अधिकतम मूल्य 51 था।

बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल खेलों के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों के बीच समायोजन के स्तर का पता लगाने के लिए, टी-टेस्ट सांख्यिकी का उपयोग किया गया और उसको सारणी संख्या-4 में प्रस्तुत किया गया।

सारणी 4: बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल खेलों के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों के बीच समायोजन के स्तर का टी-अनुपात

खेल

टी-अनुपात

 

बास्केटबॉल खेल के खिलाड़ी

वॉलीबॉल खेल के खिलाड़ी

-.169’

मध्य

45.63

45.70

मानक विचलन

2.83

2.26

सार्थकता का स्तर = .05

स्वतंत्रता की डिग्री 238 पर सार्थक होने के लिए आवश्यक टी-मान = 1.96

सारणी संख्या-4 के अवलोकन से ज्ञात होता है कि समायोजन के संबंध में बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल खेलों के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों के औसत स्कोर के बीच सार्थक अंतर नहीं पाया गया क्योंकि टी-अनुपात -.169 पाया गया। यह सार्थकता के स्तर .05 पर आवश्यक मान से कम था।

यह चित्र संख्या-2 में दर्शाया गया है।

चित्र 2 में बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल खेलों के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों के बीच समायोजन के अन्तर को दर्शाया गया है।

परिणामों की चर्चा

वर्तमान अध्ययन चैधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ व माँ शाकुम्भरी देवी विश्वविद्यालय, सहारनपुर के बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर पर भाग लेने वाले खिलाड़ियों के मध्य व्यक्तित्व और समायोजन की तुलना करने के लिए डिजाइन किया गया था। इस अध्ययन का उद्देश्य चैधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ व माँ शाकुम्भरी देवी विश्वविद्यालय, सहारनपुर के बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों के मध्य व्यक्तित्व और समायोजन के अंतरों का पता लगाना था। शोध विद्वानों का इरादा खिलाड़ियों के व्यक्तिगत जीवन का पता लगाना नहीं था। इस शोध के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए खिलाड़ियों के व्यक्तित्व को मापने हेतु आर0बी0 कैटेल द्वारा निर्मित 16च्थ् व्यक्तित्व परीक्षण का प्रयोग किया गया और समायोजन को मापने हेतु ए॰के॰पी॰ सिन्हा व आर॰पी॰ सिंह द्वारा निर्मित ‘एडजस्टमेंट इन्वेंट्री फॉर कॉलेज स्टूडेन्ट’ का प्रयोग किया गया है। विषयों की आयु 17 से 25 वर्ष के बीच थी। बास्केटबॉल व वॉलीबॉल के खेल के खिलाड़ियों के बीच व्यक्तित्व और समायोजन के तुलनात्मक अध्ययन के लिए टी-टेस्ट का प्रयोग किया गया। परिकल्पनाओं के परीक्षण के लिए महत्व का स्तर 0.05 निर्धारित किया गया था।

अध्ययन के परिणाम से ज्ञात होता है की बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों के मध्य व्यक्तित्व के तुलनात्मक परिणाम के बीच महत्वपूर्ण अंतर का पता चला। बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों के मध्य व्यक्तित्व के स्तर की तुलना करने पर बास्केटबॉल के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों का औसत स्कोर वॉलीबॉल के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों की तुलना में कम पाया गया। भावसार संदीप और डॉ. चकवर्ती शिप्रा (2023)[5],ए कुमार रविंदर (2022)[6] पटेल कपिल एस (2019)[7], ए उपाध्याय अजयपाल (2018)[8]  और यांग सी. सी. और रॉबिन्सन ए. (2018)[9] के द्वारा किए गए अध्ययनों के परिणाम से मिलते है। बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों के मध्य समायोजन के तुलनात्मक परिणाम के बीच महत्वपूर्ण सार्थक अंतर नहीं पाया गया। बास्केटबॉल तथा वॉलीबॉल के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों के मध्य समायोजन के स्तर की तुलना करने पर वॉलीबॉल के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों का औसत स्कोर बास्केटबॉल के अन्तरमहाविद्यालयी स्तर के खिलाड़ियों की तुलना में कम पाया गया। दिव्य दुरेन (2022)[10],ए मिस मौमिता सेन (2019)[11],ए भावसार संदीप और डॉ. चकबर्ती शिप्रा (2023)[12] और डॉ. केने सविता एम. और प्रो. विश्वकर्मा गणेश एस. (2022)[13], के द्वारा किए गए अध्ययनों के परिणाम से मिलते है।

संदर्भ

1.            कमलेश, एम0एल0 (1998), “साइकोलोजी इन फिजीकल एजुकेशन एण्ड स्पोटर्स“,  मेट्रोपोलिटन बुक कम्पनी, नई दिल्ली।

2.            एडरमैन, आर0 बी0 (1974), “साइकोलाॅजिकल बीहैवियर इन स्पोर्टस“,  सैन्टर्स फिलेडेफिया।

3.            अंकुर (2023), “उत्तराखंड राज्य के मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में अध्ययनरत बी.पी.एड. छात्रों की चयनित मनोवैज्ञानिक विशेषताओं का तुलनात्मक अध्ययन“, अप्रकाशित शोध  साहित्य, शारीरिक शिक्षा विभाग, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविधालय, हरिद्वार। 

4.            कुमार पी. और गुर्जर एम.एस. (2016), “विशेष और सामान्य किशोरों की समायोजन क्षमता पर तुलनात्मक अध्ययन”, एजुकेशनल क्वेस्टः एन इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एजुकेशन एंड एप्लाइड सोशल साइंसेज वॉल्यूम 7 नंबर 3, पृ. 231-241

5.            भावसार संदीप और डॉ. चकबर्ती शिप्रा (2023), “पुरुष और महिला सॉफ्टबॉल खिलाड़ियों के बीच व्यक्तित्व अंतर का तुलनात्मक अध्ययन“, इंडियन जर्नल ऑफ फिजिकल एजुकेशन, स्पोट्र्स एंड एप्लाइड साइंस, खंड 13 नंबर 3, पृष्ठ 1-12

6.            कुमार रविंदर (2022), “नई दिल्ली के खिलाड़ियों और गैर-खिलाड़ियों के बीच चयनित बिग-फाइव व्यक्तित्व लक्षणों और शारीरिक मापदंडों का तुलनात्मक अध्ययन“, द इंटरनेशनल जर्नल ऑफ इंडियन साइकोलॉजी, खंड 10 अंक 1, पृष्ठ 1058-1070

7.            पटेल कपिल एस (2019), “एथलीटों और गैर-एथलीटों के बीच व्यक्तित्व विशेषता की तुलना करें“, इंटरनेशनल जर्नल ऑफ योगिक, ह्यूमन मूवमेंट एंड स्पोट्र्स साइंसेज, खंड 4 अंक 1, पृष्ठ 155-156

8.            उपाध्याय अजयपाल (2018), “बास्केटबॉल और वॉलीबॉल खिलाड़ियों की खेल क्षमता के साथ चयनित मनोवैज्ञानिक चर का अध्ययन“, इंटरनेशनल जर्नल ऑफ क्रिएटिव रिसर्च थॉट्स, खंड 6 अंक 2, पृष्ठ 649-654

9.            यांग सी. सी. और रॉबिन्सन ए. (2018), “जरूरी नहीं कि हानिकारकः दो सामाजिक तुलना अभिविन्यास और सोशल मीडिया के उपयोग और कॉलेज सामाजिक समायोजन के साथ उनके संबंध“, मानव व्यवहार में कंप्यूटर, खंड 84, पृष्ठ 49-57

10.         दिव्य दुरेन (2022), ‘‘टीम खिलाड़ी और एकल खिलाड़ी के भावनात्मक बुद्धि व समायोजन का तुलनात्मक अध्ययन’’, द इन्टरनेशनल जर्नल आॅफ इण्डियन साइकोलाॅजी, खण्ड 10 अंक 1, पृ॰सं॰ 1172-1181

11.         मिस मौमिता सेन (2019) “वॉलीबॉल और बास्केटबॉल खिलाड़ियों की चयनात्मक समायोजन क्षमता का तुलनात्मक अध्ययन”, इतिहास अनुसंधान जर्नल, खंड 5 अंक 6, पृ. 879-885

12.         भावसार संदीप और डॉ. चकबर्ती शिप्रा (2023), “पुरुष और महिला सॉफ्टबॉल खिलाड़ियों के बीच व्यक्तित्व अंतर का तुलनात्मक अध्ययन“, इंडियन जर्नल ऑफ फिजिकल एजुकेशन, स्पोट्र्स एंड एप्लाइड साइंस, खंड 13 नंबर 3, पृष्ठ 1-12

13.         डॉ. केने सविता एम. और प्रो. विश्वकर्मा गणेश एस. (2022), “वॉलीबॉल खिलाड़ियों पर पुरुष और महिला के बीच व्यक्तित्व लक्षणों का तुलनात्मक अध्ययन“, रिसर्च हब इंटरनेशनल पीयर-रिव्यूड मल्टीडिसिप्लिनरी ई-जर्नल, वॉल्यूम 3 अंक 2, पृष्ठ 49-52