व्यक्तिगत
एवं दलीय
खिलाड़ियों के
मध्य प्रेरणा
का एक तुलनात्मक
अध्ययन
धनंजय
सिंह1*, डॉ. दिवेश
चैधरी2
1
शोधकर्ता,
शारीरिक
शिक्षा विभाग,
आईआईएमटी
विश्वविद्यालय,
मेरठ
(उ.प्र.)
laxmiadvertising.fzd@gmail.com
2
आचार्य, शारीरिक
शिक्षा विभाग,
आईआईएमटी
विश्वविद्यालय,
मेरठ
(उ.प्र.)
सार: वर्तमान शोध
अध्ययन का
लक्ष्य
व्यक्तिगत
एवं दलीय
खिलाड़ियों के
मध्य प्रेरणा
का एक
तुलनात्मक
अध्ययन करना
था। शोध का
अन्य गौण
उद्देश्य
पुरुष एवं
महिला खिलाड़ी
जो व्यक्तिगत
एवं दलीय खेल
समहुओ से है, उनके
मध्य तुलना
करना भी था।
शोध के लिए
कुल 200
खिलाड़ियों को
न्यादर्श के
रूप में
सम्मिलित
किया गया था, जिसमें
100
खिलाड़ी
व्यक्तिगत
खेलो से एवं 100
खिलाड़ी दलीय
खेलो के थे।
न्यादर्श का
चयन स्थल
डाॅक्टर
राममनोहर
लोहिया अवध
विश्वविद्यालय
अयोध्या था।
न्यादर्श से
आंकड़ों को
एकत्रित करने
के लिए सत्र 2023-24
के
अंर्तमहाविद्यालयी
प्रतियोगिताओं
मे प्रतिभाग
करने वाले
खिलाड़ियों का
चयन
यादृच्छिक
रूप से किया
गया था। जिनकी
उम्र 17
से 25
वर्ष के मध्य
थी।
व्यक्तिगत
एवं दलीय
खिलाड़ियों के
मध्य प्रेरणा
को मापने के
लिए 1995
मे पेलिटियर
द्वारा
निर्मित खेल
प्रेरणा पैमाना
का प्रयोग
किया गया।
खिलाड़ियों के मध्य
प्रेरणा की
तुलना के लिए, टी-अनुपात
का प्रयोग
किया था।
अध्ययन के लिए
शून्य
परिकल्पना का
निर्माण किया
था। परिकल्पनाओं
को स्वीकृत
एवं अस्वीकृत
करने के लिए विश्वसनीयता
का स्तर .05 था।
अध्ययन के
फलांक से
ज्ञात होता है
कि व्यक्तिगत
और दलीय खेलों
मे हिस्सा लेने
वाले
खिलाड़ियों के
मध्य अन्तर
पाया गया।
मुख्य
शब्द:
व्यक्तिगत
खेल,
दलीय खेल, पुरुष
खिलाड़ी,
महिला
खिलाड़ी एवं
प्रेरणा।
प्रस्तावना
प्रकृति
में खेल
सार्वभौम है,
सभी बालक
खेलते हैं तथा
विलक्षणता से
उनके खेलने
में समानता
होती हैं।
उनका खेलना
जाति, रंग, नस्ल तथा
राष्ट्रीयता
आदि के घेरे
से परे होता
है प्रत्येक
बालक अपनी
शिशु अवस्था
के दौरान वृद्धि
एवं विकास की
विभिन्न
अवस्थाओं में
खेलता है।
खेलना बालक का
स्वाभाविक
गुण है, खेल
गतिविधियाँ
बालक के विकास
तथा वृद्धि में
सीधे प्रभाव
डालती है।
इसमें कल्पना
शक्ति का बहुत
अधिक समावेश
होता है। हम
बालक की
कल्पना शक्ति
का उसके
द्वारा
खिलौने से
खेलते हुए
उसको तोड़ा
जाना पुनः
अपनी कल्पना
से जोड़े जाने
की किया करते
हुए अवलोकन कर
सकते हैं। यदि
कोई बालक अपने
विकास की
प्रारम्भिक
अवस्था में इस
प्रकार खेलता
नहीं है या
उसके साथ कोई
समस्या है और
उसका ऐसा
व्यवहार एक
सामान्य बालक
के समान उसकी
सामान्य
वृद्धि तथा
विकास की गति की
शैली से परे
हटाता है।
खेल की
शुरुआत और
कार्यात्मक
रूप मे विकसित
होने के कारण
आज भी अज्ञात
है। कभी खेलो
को समय की
बर्बादी माना
जाता था।
लेकिन आज
खेलों को शिक्षण
तथा व्यक्तित्व
के विकास के
लिए
महत्वपूर्ण
माना जाता है।
(1)
आधुनिक
काल का सबसे
अधिक चर्चित
विषय है मनोविज्ञान।
हर विषय में
‘मनोविज्ञान‘
किसी न किसी
रूप में
सम्मिलित
रहता है, क्योंकि
आज के युग में
जितना भी
ज्ञान विकसित हुआ
है उसमें मानव
का व्यवहार ही
भाग लेता है।
यही
मानव-व्यवहार
किसी न किसी
कारण-प्रतिकारण,
क्रिया-प्रतिक्रिया
तथा सामाजिक
एवं भौतिक परिस्थितियों
से प्रभावित
होता है। जिस
प्रकार का
प्रभाव मानव
के व्यवहार पर
पड़ता है, मानव-व्यवहार
उसी प्रकार
कार्य करने
लगता है। अतः
मानव-व्यवहार
को वैज्ञानिक
ढंग से समझने
के लिए
मनोविज्ञान
विषय का विकास
हुआ। मनोविज्ञान
के बिना
मानव-व्यवहार
का अध्ययन
कठिन ही नहीं,
असंभव भी
है।
मनोविज्ञान
विषय की गहराई
तक जाने के
लिए तथा इसके
शिक्षा के साथ
सम्बन्धों पर
प्रकाश डालने
के लिए
मनोविज्ञान
के अर्थ तथा
परिभाषाओं का
अध्ययन अति
आवश्यक हैं।
मनोविज्ञान
का अर्थ, परिभाषाओं
आदि के अध्ययन
के पश्चात् ही
मनोविज्ञान
के अन्य
पक्षों का
अध्ययन संभव
है।(2)
इंसान की
जिंदगी बिना
लक्ष्य के
किसी काम की नहीं।
आपने अपने
जिंदगी में न
जाने कितने
सफल इंसानों
को देखा होगा
लेकिन क्या
आपने कभी जानने
की कोशिश की
है कि आखिर वह
आज सफल क्यों
है। इंसान को
सफलता की ओर
ले कर जाती है
लेकिन क्या आप
जानते हैं कि
आखिर यह
प्रेरणा क्या
है।
प्रेरणा
एक शक्ति
स्रोत होती है
जो इंसान को अपने
लक्ष्य
प्राप्ति के
लिए उत्तेजना
देती है।
प्रेरक शक्ति
ही इंसान को
अपने
आकांक्षाओं
को पूरा करने
की हिम्मत
देती है और
इंसान इसके
लिए कुछ भी कर
सकता है।
सफल होने
के मायने हर
इंसान के अलग
हो सकते हैं
लेकिन मंजिल
इनकी एक ही
होती है।एक
सफल इंसान को
इज्जत की नजर
से देखा जाता
हैऔर पूरी दुनिया
में उनका
बोलबाला होता
है। किसी को
लगता है कि
अगर उसके पास
ढेर सारे पैसे
हैं तो वह सफल
है।
लेकिन
अपने लक्ष्य
को प्राप्त
करने के लिए
एक जज्बे की
जरूरत होती है
जो हर सफल
इंसान के पीछे
कामयाबी का
राज है।(3)
कार्यप्रणाली
वर्तमान
शोध के लिए
कुल 200 खिलाड़ियों
को न्यादर्श
के रूप में
सम्मिलित किया
गया था, जिसमें 100 खिलाड़ी
व्यक्तिगत
खेलो से एवं 100 खिलाड़ी
दलीय खेलो के
थे। न्यादर्श
का चयन स्थल
डाॅक्टर
राममनोहर
लोहिया अवध
विश्वविद्यालय
अयोध्या था।
न्यादर्श से
आंकड़ों को
एकत्रित करने
के लिए सत्र 2023-24 के
अंर्तमहाविद्यालयी
प्रतियोगिताओं
मे प्रतिभाग
करने वाले
खिलाड़ियों का
चयन
यादृच्छिक
रूप से किया
गया था। जिनकी
उम्र 17 से 25 वर्ष के
मध्य थी।
व्यक्तिगत
एवं दलीय
खिलाड़ियों के
मध्य प्रेरणा
को मापने के
लिए 1995 मे पेलिटियर
द्वारा
निर्मित खेल
प्रेरणा पैमाना
का प्रयोग
किया गया।
खिलाड़ियों के
मध्य प्रेरणा
की तुलना के
लिए, टी-अनुपात का
प्रयोग किया
था। अध्ययन के
लिए शून्य
परिकल्पना का
निर्माण किया
था।
परिकल्पनाओं
को स्वीकृत
एवं अस्वीकृत
करने के लिए
विश्वसनीयता का
स्तर .05 था।
अध्ययन
के परिणाम
तालिका
1:
व्यक्तिगत
और दलीय खेलों
के खिलाड़ियों
की ‘प्रेरणा’
सम्बन्धी
आंकड़ों का
वर्णनात्मक
विश्लेषण
|
वर्णनात्मक
आँकड़े |
व्यक्तिगत
खेल |
दलीय
खेल |
|
मध्य |
47.22 |
68.23 |
|
मानक
विचलन |
5.47 |
2.91 |
|
रेंज |
20 |
13 |
|
न्यूनतम |
37 |
62 |
|
अधिकतम |
57 |
75 |
तालिका
संख्या-1 के
अवलोकन से
ज्ञात होता है
कि व्यक्तिगत
खेलों के
खिलाड़ियों
कीे प्रेरणा
का मध्य 47.22, मानक
विचलन 5.47, रेंज 20,
न्यूनतम
मूल्य 37 एवं
अधिकतम मूल्य 57 था, जबकि दलीय
खेलों की
खिलाड़ियों
कीे प्रेरणा का
मध्य 68.22, मानक
विचलन 2.91, रेंज 13,
न्यूनतम
मूल्य 62 एवं
अधिकतम मूल्य 75 था।
तालिका
संख्या-2
व्यक्तिगत
और दलीय खेलों
के खिलाड़ियों
की ‘प्रेरणा’
सम्बन्धी
आंकड़ों के
टी-अनुपात का
विश्लेषण
|
खिलाड़ियों का
स्वरूप |
खिलाड़ियों की
संख्या |
माध्य |
मानक विचलन |
टी’ मूल्य |
प्रिकलित ‘टी’
मान |
परिणाम (सार्थकता
स्तर-0.05) |
|
व्यक्तिगत खेल |
100 |
47.22 |
5.47 |
-33.899 |
1.97 |
सार्थक |
|
दलीय खेल |
100 |
68.23 |
2.91 |
उपर्युक्त
तालिका से
स्पष्ट है कि
व्यक्तिगत और
दलीय खेलों के
खिलाड़ियों के
मध्य
परिकल्पित ‘टी‘
मूल्य -33.899 है जो 0.5 सार्थकता
स्तर पर
प्रदत्त ‘टी‘
तालिका मूल्य 1.97 से अधिक
है, इससे
स्पष्ट होता
है कि दोनों
समूह की
‘प्रेरणा’ के
मध्य सार्थक
अन्तर है।
तत्पश्चात
मध्यमानों को
देखने से
ज्ञात होता है
कि व्यक्तिगत
खेलों के
खिलाड़ियों की
‘प्रेरणा’ का
मध्यमान 47.22 है जो कि
दलीय खेलों के
खिलाड़ियों की
‘प्रेरणा’ के
मध्यमान 68.23 से कम है।
अतः दलीय
खेलों के
खिलाड़ियों
में ‘प्रेरणा’
का स्तर
व्यक्तिगत
खेलों के
खिलाड़ियों की
तुलना में
अधिक है।

चित्र
1:
व्यक्तिगत
और दलीय खेलों
के खिलाड़ियों
की
ष्प्रेरणाष्
सम्बन्धी
आंकड़ों के
टी.अनुपात का
विश्लेषण
तालिका 3: व्यक्तिगत
और दलीय खेलों
के पुरुष
खिलाड़ियों की
‘प्रेरणा’
सम्बन्धी
आंकड़ों का
वर्णनात्मक
विश्लेषण
|
वर्णनात्मक आँकड़े |
व्यक्तिगत खेल
के पुरुष |
दलीय खेल के पुरुष |
|
मध्य |
42.56 |
66.30 |
|
मानक विचलन |
2.86 |
2.06 |
|
रेंज |
11 |
8 |
|
न्यूनतम |
37 |
62 |
|
अधिकतम |
48 |
70 |
तालिका
संख्या-3 के
अवलोकन से
ज्ञात होता है
कि व्यक्तिगत
खेलों के
पुरुष
खिलाड़ियों
कीे प्रेरणा
का मध्य 42.56, मानक
विचलन 2.86, रेंज 11,
न्यूनतम
मूल्य 37 एवं
अधिकतम मूल्य 48 था, जबकि दलीय
खेलों के
पुरुष
खिलाड़ियों
कीे प्रेरणा
का मध्य 66.30, मानक
विचलन 2.06, रेंज 8,
न्यूनतम
मूल्य 62 एवं
अधिकतम मूल्य 70 था।
तालिका
4:
व्यक्तिगत
और दलीय खेलों
के पुरुष
खिलाड़ियों की
‘प्रेरणा’
सम्बन्धी
आंकड़ों के
टी-अनुपात का
विश्लेषण
|
पुरुष खिलाड़ियों
का स्वरूप |
पुरुष खिलाड़ियों
की संख्या |
माध्य |
मानक विचलन |
‘टी’ मूल्य |
प्रिकलित ‘टी’
मान |
परिणाम (सार्थकता
स्तर-0.05) |
|
व्यक्तिगत खेल |
50 |
42.56 |
66.30 |
-47.623 |
1.96 |
सार्थक |
|
दलीय खेल |
50 |
2.86 |
2.06 |
उपर्युक्त
तालिका से
स्पष्ट है कि
व्यक्तिगत और
दलीय खेलों के
पुरुष
खिलाड़ियों के
मध्य
परिकल्पित
‘टी‘ मूल्य -47.623 है जो 0.5 सार्थकता
स्तर पर
प्रदत्त ‘टी‘
तालिका मूल्य 1.96 से अधिक
है, इससे
स्पष्ट होता
है कि दोनों
समूह की
‘प्रेरणा’ के
मध्य सार्थक
अन्तर है।
तत्पश्चात
मध्यमानों को
देखने से
ज्ञात होता है
कि व्यक्तिगत खेलों
के पुरुष
खिलाड़ियों की
‘प्रेरणा’ का
मध्यमान 42.56 है जो कि
दलीय खेलों के
पुरुष
खिलाड़ियों की
‘प्रेरणा’ के
मध्यमान 66.30 से कम है।
अतः दलीय
खेलों के
पुरुष
खिलाड़ियों
में ‘प्रेरणा’
का स्तर
व्यक्तिगत
खेलों के पुरुष
खिलाड़ियों की
तुलना में
अधिक है।

चित्र
2:
व्यक्तिगत और
दलीय खेलों के
पुरुष
खिलाड़ियों की
‘प्रेरणा’
सम्बन्धी
आंकड़ों के
टी-अनुपात का
विश्लेषण
तालिका 5: व्यक्तिगत
और दलीय खेलों
के महिला
खिलाड़ियों की
‘प्रेरणा’
सम्बन्धी
आंकड़ों का
वर्णनात्मक
विश्लेषण
|
वर्णनात्मक आँकड़े |
व्यक्तिगत खेल
कि महिला |
दलीय खेल कि महिला |
|
मध्य |
51.88 |
70.16 |
|
मानक विचलन |
2.83 |
2.30 |
|
रेंज |
11 |
10 |
|
न्यूनतम |
46 |
65 |
|
अधिकतम |
57 |
75 |
तालिका
संख्या-5 के
अवलोकन से
ज्ञात होता है
कि व्यक्तिगत
खेलों कि
महिला
खिलाड़ियों
कीे प्रेरणा
का मध्य 51.88, मानक
विचलन 2.83, रेंज 11,
न्यूनतम
मूल्य 46 एवं
अधिकतम मूल्य 57 था, जबकि दलीय
खेलों कि
महिला
खिलाड़ियों
कीे प्रेरणा
का मध्य 70.16, मानक
विचलन 2.30, रेंज 10,
न्यूनतम
मूल्य 65 एवं
अधिकतम मूल्य 75 था।
तालिका 6: व्यक्तिगत
और दलीय खेलों
कि महिला
खिलाड़ियों की
‘प्रेरणा’
सम्बन्धी
आंकड़ों के
टी-अनुपात का
विश्लेषण
|
पुरुष खिलाड़ियों
का स्वरूप |
पुरुष खिलाड़ियों
की संख्या |
माध्य |
मानक विचलन |
‘टी’ मूल्य |
प्रिकलित ‘टी’
मान |
परिणाम (सार्थकता
स्तर-0.05) |
|
व्यक्तिगत खेल |
50 |
51.88 |
2.83 |
-35.490 |
1.96 |
सार्थक |
|
दलीय खेल |
50 |
70.16 |
2.30 |
उपर्युक्त
तालिका से
स्पष्ट है कि
व्यक्तिगत और
दलीय खेलों कि
महिला
खिलाड़ियों के
मध्य परिकल्पित
‘टी‘ मूल्य -35.490 है जो 0.5 सार्थकता
स्तर पर
प्रदत्त ‘टी‘
तालिका मूल्य 1.96 से अधिक
है, इससे
स्पष्ट होता
है कि दोनों
समूह की
‘प्रेरणा’ के
मध्य सार्थक
अन्तर है।
तत्पश्चात
मध्यमानों को
देखने से
ज्ञात होता है
कि व्यक्तिगत
खेलों कि
महिला
खिलाड़ियों की
‘प्रेरणा’ का
मध्यमान 51.88 है जो कि
दलीय खेलों कि
महिला
खिलाड़ियों की
‘प्रेरणा’ के
मध्यमान 70.16 से कम है।
अतः दलीय
खेलों कि
महिला
खिलाड़ियों
में ‘प्रेरणा’
का स्तर
व्यक्तिगत
खेलों कि महिला
खिलाड़ियों की
तुलना में अधिक
है।

चित्र
3:
व्यक्तिगत और
दलीय खेलों कि
महिला
खिलाड़ियों की
‘प्रेरणा’
सम्बन्धी
आंकड़ों के
टी-अनुपात का
विश्लेषण
परिणामों की
चर्चा
वर्तमान
शोध अध्ययन को
व्यक्तिगत
एवं दलीय खिलाड़ियों
के मध्य
प्रेरणा की
तुलना करने के
लिए किया गया
था। शोध के
लिए खिलाड़ियों
को डाॅक्टर
राममनोहर
लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या
मे आयोजित
सत्र 2023-24 कि
अंर्तमहाविद्यालयी
प्रतियोगिताओं
मे प्रतिभाग
करने वाले
खिलाड़ियों मे
से यादृच्छिक
रूप से चुना
गया था। शोध
अध्ययन का
मुख्य उद्देश्य
व्यक्तिगत
एवं दलीय
खिलाड़ियों के
मध्य प्रेरणा
के अंतरों का
पता लगाना था।
खिलाड़ियों के
मध्य प्रेरणा
को मापने के
लिए 1995 मे
पेलिटियर
द्वारा
निर्मित खेल
प्रेरणा पैमाना
का प्रयोग
किया गया था।
शोध
के परिणाम
बताते है की
व्यक्तिगत
एवं दलीय
खिलाड़ियों के
मध्य प्रेरणा
मे
महत्वपूर्ण अंतर
पाया गया।
दोनों प्रकार
के वर्गो के
खिलाड़ियों के
मध्य प्रेरणा
की तुलना करने
पर ज्ञात होता
है की,
व्यक्तिगत
खेल के
खिलाड़ियों का
औसत स्कोर दलीय
खेल के
खिलाड़ियों की
तुलना में कम
था। अध्ययन के
परिणाम बताते
है की,
दलीय
खेल के
खिलाड़ियों के
प्रेरणा के
स्तर का अधिक
होने का कारण
दलीय खेलो के
दलों मे अधिक
खिलाड़ी होने
के कारण
खिलाड़ियों को
दल मे स्थान
बनाए रखने के
लिए अपने
प्रेरणा के
स्तर बनाए
रखना पड़ता है।
दूसरे शब्दों
में,
आवंटित
समय में खेल
को पूरा किए
जाने और बेहतर
परिणाम के लिए
दल के
खिलाड़ियों मे
प्रेरणा का
स्तर अधिक
रहता है। वर्तमान
अध्ययन के
परिणाम शर्मा
सान्या (2023)(4), शेरानी
शाहिना और
टाइटस सोफी (2023)(5), पोपोविच
इहोर,
प्लोखिख
विक्टर,
एंटोनिना
ह्रीस और अन्य
(2023)(6), सीलन
लेवेंट,
बिलन
एडा,
एलिओज
मुरात और अन्य
(2022)(7), लियॉन्ग
डी. सी. पी. (2022)(8) और
ओलेना बी.,
इहोर
पी.,
इनेसा
एच. और अन्य (2022)(9) के
द्वारा किए गए
अध्ययनों के
परिणाम से
मिलते है।
संदर्भ
1-
सुदर्शन
पाठक (1999), ‘‘वूमेन एव
काम्पेटेटिव
स्र्पोट्स‘‘,
आॅल
इंडिया
फिजिकल
एज्युकेशन
अन्ड एलाइड टीचर्स
एसोसिएशन,
खण्ड -7 अंक -5, पृष्ठ 22-24।
2-
कमलेश
एम. एल. (1983) ‘‘शारीरिक
शिक्षा और खेल
का
मनोविज्ञान‘‘,
मेट्रोपॉलिटन
बुक कंपनी,
नई
दिल्ली।
3-
सपना
कौशिक (2006), ‘‘शिक्षा के
मनोवैज्ञानिक
पहलू‘‘, कौशिक
पब्लिकेशन,
मेरठ,
पृष्ठ 59-71।
4-
शर्मा
सान्या (2023), ‘‘व्यक्तिगत
और टीम खेल
एथलीटों के
बीच व्यक्तित्व
प्रकार, खेल प्रेरणा
और
प्रतिस्पर्धी
आक्रामकता और
क्रोध का एक
अध्ययन‘‘, मनोविज्ञान
में अंतःविषय
दृष्टिकोण के
अंतर्राष्ट्रीय
जर्नल, खंड 1 अंक 3, पृष्ठ 01-73।
5-
शेरानी
शाहिना और
टाइटस सोफी (2023),
‘‘टीम
और व्यक्तिगत
एथलीटों की
तुलनात्मक
एथलेटिक
उपलब्धि
प्रेरणा के
लिए एक अध्ययन‘‘,
जर्नल ऑफ
स्पोर्ट्स
साइंस एंड
न्यूट्रिशन,
खंड 4 अंक 2, पृष्ठ 136-137।
6-
पोपोविच
इहोर, प्लोखिख
विक्टर, एंटोनिना
ह्रीस और अन्य
(2023),
‘‘प्रेरक
अभिविन्यास
के आयामों में
फुटबॉलरों की
भावनात्मक
बुद्धिमत्ता
का संचालन
बुनियादी
स्थितियों पर
आधारित
विश्लेषण‘‘,
जर्नल ऑफ
फिजिकल
एजुकेशन एंड
स्पोर्ट्स,
खंड 23 अंक 3, पृष्ठ 772-781।
7-
सीलन
लेवेंट, बिलन एडा,
एलिओज
मुरात और अन्य
(2022),
‘‘शारीरिक
शिक्षा और खेल
प्रशिक्षण का
अध्ययन करने
वाले आउटडोर
और इनडोर
एथलेटिक्स के
प्रेरणा
स्तरों की
तुलना‘‘, जर्नल ऑफ
एजुकेशनल इश्यूज,
खंड 8 अंक 1, पृष्ठ 629-642।
8-
लियॉन्ग
डी. सी. पी. (2022), ‘‘21वीं सदी
के
शिक्षार्थियों
की भावनात्मक
स्थिरता और
प्रेरणा
सीखने के
सिद्धांतों
की तुलनात्मक
समीक्षा‘‘,
क्वांटम
जर्नल ऑफ सोशल
साइंसेज एंड
ह्यूमैनिटीज,
खंड 3 अंक 6, पृष्ठ 68-80।
9-
ओलेना
बी., इहोर पी., इनेसा एच.
और अन्य (2022), ‘‘महिला
एथलीटों के
प्रेरक
अभिविन्यास
की संरचना में
शैक्षिक
स्थान की
मनोवैज्ञानिक
सुरक्षारू एक
तुलनात्मक
विश्लेषण‘‘,
जर्नल ऑफ
फिजिकल
एजुकेशन एंड
स्पोर्ट, खंड 22 अंक 11, पृष्ठ 2723-2732।