सुरक्षा, स्वास्थ्य व मनोरंजन के संदर्भ में अस्त्र-शस्त्र और संगीत का तुलनात्मक अध्ययन

The Comparative Study of Weapons, Music, and Their Impact on Security, Health, and Entertainment

by Dr. Vinod Saroha*,

- Published in Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education, E-ISSN: 2230-7540

Volume 16, Issue No. 4, Mar 2019, Pages 78 - 82 (5)

Published by: Ignited Minds Journals


ABSTRACT

मानव ने आविष्कारी और खोजी सोच विकसित होने पर भोजन व सुरक्षा हेतु समूहों में रहने के साथ पत्थरों के प्रयोग के बाद भाले, बाड़ आदि बना लिए थे। इसके साथ झरने, बूंदों, हवाओं, पक्षियों, पशुओं, कंकर-पत्थरों के लुढ़कने-गिरने आदि की आवाजों से मरनोरंजन होने पर विभिन्न प्रकार की शृंगारित ध्वनियों का आनन्द लेने के साथ इन पर शोध करना शुरू किया तो नए-नए प्रयोगों के परिणाम स्वरूप परिष्कृत हुए ‘संगीत’ से मनोरंजन के साथ शरीर-मन की सुरक्षा और रोगोपचार कार्य भी समयानुसार हुए। तकनीकी विकास बढ़ने पर कुछ लोगों ने मनुष्यों के समूहों, राजीय-राष्ट्रीय-अंर्तराष्ट्रीय सीमाओं पर विवाद खड़े कर लिए, जिस कारण विभिन्न वर्ग-सम्प्रदायों, देशों में विवाद के साथ नरसंहार भी बढ़ रहे हैं। बहुत दिनों से हालात ऐसे भी बदले हैं कि मनुष्य ने हथियारों को मनोरंजन के तौर पर भी इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जिसके नुकसानदायक परिणाम हुए हैं। अतः ‘विकास’ की बजाय ‘विनाश’ को आमंत्रण देते बढ़ते हुए अत्याधुनिक हथियारों, बमों आदि पर किया जाने वाला अत्यधिक खर्च ‘सुरक्षा’ को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से ‘समस्या’ में बदल रहा है, जिस खर्च को नियंत्रित कर ‘मनोवैज्ञानिक स्वस्थ सोच’ के विस्तार पर खर्च बढ़ाने की अधिक आवश्यकता है, ताकि जीवन प्राकृतिक ही पूर्ण हो।

KEYWORD

सुरक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन, अस्त्र-शस्त्र, संगीत, विकास, विनाश, हथियार, बॉम, मनोवैज्ञानिक स्वस्थ सोच