उदयभानु हंस जी की गजलों में प्रेम भावना

An exploration of love sentiments in the ghazals of Udaybhanu Hans

by Sumit .*,

- Published in Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education, E-ISSN: 2230-7540

Volume 16, Issue No. 4, Mar 2019, Pages 545 - 547 (3)

Published by: Ignited Minds Journals


ABSTRACT

उदयभानु हंस जी की गजलों में प्रेम संबंधी संवेदना स्वाभाविक है। किसी भी वस्तु के प्रति आकर्षित होना मानव मन की सहज प्रक्रिय है, जो प्रेम में बदल जाती है। प्रत्येक कवि इसे अपने काव्य में उतारता है। उदयभानु हंस जी ने भी इसे अपने काव्य में उकेरा है। वैसे तो समकालीन कवियों ने मनुष्य के बेबसी, निराशा, कुण्ठा, और भय आदि को वर्णित किया है लेकिन काव्य में पाठक की रूचि को बढ़ाने के लिए प्रेम को अपने काव्य में समाहित किया है। कविता की जादुई शक्ति से कवि अपनी कविताओं में एक मासूम सा सुंदर और सम्मोहक संसार रचते हैं। जिसमें प्रेमनिष्ठ संवेदना को स्थान मिला है। उन्होंने जीवन को अपने आप में सुंदर बताया है।

KEYWORD

उदयभानु हंस, गजलों, प्रेम भावना, संवेदना, काव्य, मनुष्य, बेबसी, निराशा, कुण्ठा, भय, रूचि, जादुई शक्ति, मासूम सा सुंदर, सम्मोहक संसार, प्रेमनिष्ठ संवेदना, जीवन