हिन्दी साहित्य के आदिकाल में नाथ सम्प्रदाय का योगदान

The Influence of Nath Sampradaya in the Ancient Period of Hindi Literature

by Dr. Meenu .*,

- Published in Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education, E-ISSN: 2230-7540

Volume 16, Issue No. 5, Apr 2019, Pages 1352 - 1354 (3)

Published by: Ignited Minds Journals


ABSTRACT

नाथों की संख्या नौ मानी गई है। ‘शिव’ ही आदिनाथ हैं। नाथ सम्प्रदाय के प्रवर्तक मत्स्येन्द्रनाथ एवं गोरखनाथ माने गये हैं। नाथों का समय 12वीं से 14वीं शती तक है तथा हिन्दी संतकाव्य पर इनका पर्याप्त प्रभाव है। डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल ने गोरखनाथ की रचनाओं का संकुलन गोरखबानी नाम से किया है। गोरखनाथ की रचनाओं में गुरू महिमा, इन्द्रिय निग्रह, प्राण साधना, वैराग्य, कुण्डलिनी जागरण एवं शून्य समाधि का वर्णन है। गोरखनाथ ने षट्चक्रों वाला योग मार्ग हिन्दी साहित्य में चलाया।

KEYWORD

हिन्दी साहित्य, नाथ सम्प्रदाय, आदिकाल, मत्स्येन्द्रनाथ, गोरखनाथ, गोरखबानी, गुरू महिमा, इन्द्रिय निग्रह, प्राण साधना, षट्चक्रों