मृणाल पाण्डे के साहित्य में सांस्कृतिक जीवन-दर्शन
भारतीय संस्कृति में साहित्य के महत्त्वपूर्ण आधार के रूप में श्रेष्ठ कवि मृणाल पाण्डे का अध्ययन
by Priyanka .*, Dr. Nirupama Harsh Vardhan,
- Published in Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education, E-ISSN: 2230-7540
Volume 16, Issue No. 6, May 2019, Pages 1639 - 1641 (3)
Published by: Ignited Minds Journals
ABSTRACT
संस्कृति मानव जाति को सुसंस्कृत सभ्य एवं राष्ट्र को एकसूत्र में पिरोने का महत्त्वपूर्ण कार्य करती है। संस्कृति ही मानव को अन्य प्राणियों से अलग करती है और मानव को सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी सिद्ध करती है। मोक्ष, निर्माण एवं भक्ति संस्कृति के ही रूप हैं। भारतीय संस्कृति में पितृ-मातृ भाव और सभ्य आचरण को महत्त्वपूर्ण माना है। भारतीय संस्कृति में समन्वय एवं सामंजस्य की प्रबल भावना है। भारतीय संस्कृति में धार्मिक रीति-रिवाज देवी-देवताओं की पूजा आदि को बहुत महत्त्व दिया गया है।
KEYWORD
मृणाल पाण्डे, साहित्य, संस्कृतिक जीवन-दर्शन, सभ्यता, राष्ट्र, मोक्ष, निर्माण, भक्ति, पितृ-मातृ भाव, समन्वय, सामंजस्य, धार्मिक रीति-रिवाज, देवी-देवताओं, पूजा