वर्तमान युग में गीता की सार्वभौमिकता
गीता: वर्तमान युग में सार्वभौमिक शिक्षा
by Dr. Parveen Kumar*,
- Published in Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education, E-ISSN: 2230-7540
Volume 16, Issue No. 6, May 2019, Pages 1791 - 1794 (4)
Published by: Ignited Minds Journals
ABSTRACT
वर्तमान युग में जब इंसान लोभ, द्वेष आदि की भावना से परिपूर्ण है। उस समय में श्रीमद्भगवद्गीता ही इंसान को सन्मार्ग तक पहुंचा सकती है। आज के युग में गीता ही हमें सुख - दुख, लाभ - हानि, जय - पराजय के समान रूप से रहने की शिक्षा देती है। जिस शाश्वत ग्रंथ से किसी संप्रदाय विशेष का संबंध न हो, बल्कि समस्त मानव जाति का उस पर समान अधिकार हो, तो उस महान ग्रंथ की सार्थकता का अंदाजा इसी बात से लग जाता है।
KEYWORD
वर्तमान युग, गीता, सार्वभौमिकता, श्रीमद्भगवद्गीता, संप्रदाय