न्यायिक सक्रियता बनाम न्यायिक संयम

Exploring the dynamics of judicial activism and judicial restraint in the Indian judiciary

by Sudhir Kumar*,

- Published in Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education, E-ISSN: 2230-7540

Volume 16, Issue No. 6, May 2019, Pages 2646 - 2651 (6)

Published by: Ignited Minds Journals


ABSTRACT

न्यायपालिका को संविधान के अंतर्गत एक सक्रिय भूमिका सौंपी गई है। न्यायिक सक्रियता और न्यायिक संयम उसी रचनात्मकता और व्यावहारिक ज्ञान के पहलू हैं। न्यायिक सक्रियता की अवधारणा न्यायिक संयम के ठीक विपरीत है। न्यायिक सक्रियता और न्यायिक संयम ऐसे दो शब्द हैं जिनका प्रयोग कुछ न्यायिक निर्णयों के पीछे के दर्शन और अभिप्रेरणा का वर्णन करने के लिये किया जाता है। न्यायिक सक्रियता निर्णय के एक ऐसे सिद्धांत को संदर्भित करती है जो विधि की भावना और बदलते समय पर विचार करती है, जबकि न्यायिक संयम विधि की कठोर व्याख्या और विधिक पूर्व-दृष्टांत पर निर्भर करता है।

KEYWORD

न्यायिक सक्रियता, न्यायिक संयम, न्यायपालिका, रचनात्मकता, व्यावहारिक ज्ञान, निर्णय, विधि, भावना, विचार, पूर्व-दृष्टांत