शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया में कंप्यूटर के उपयोग पर शिक्षक प्रशिक्षकों के दृष्टिकोण: एक समीक्षात्मक अध्ययन

 

रामसुरेश पटेल1*, डॉ अरुण कुमार सिंह2

1 शोधार्थी, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा, मध्य प्रदेश, भारत

ram06patel@gmail.com

2 प्रोफेसर, शिक्षा विभाग, टाटा शिक्षा महाविद्यालय, सगरा, रीवा, मध्य प्रदेश, भारत

सार: वर्तमान डिजिटल युग में कंप्यूटर एवं सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) ने शिक्षण एवं अधिगम प्रक्रिया के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन किया है। शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक प्रशिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे भावी शिक्षकों को तकनीकी दक्षता, डिजिटल साक्षरता तथा आधुनिक शिक्षण विधियों के उपयोग के लिए तैयार करते हैं। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य शिक्षण एवं सीखने की प्रक्रिया में कंप्यूटर के उपयोग के प्रति शिक्षक प्रशिक्षकों के दृष्टिकोण, कंप्यूटर आधारित शिक्षण की भूमिका, लाभ, चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं का समीक्षात्मक विश्लेषण करना है। यह अध्ययन पूर्णतः द्वितीयक स्रोतों पर आधारित एक समीक्षात्मक अध्ययन है। अध्ययन के अंतर्गत वर्ष 2015 से 2025 के मध्य प्रकाशित साहित्य का विषयवस्तु विश्लेषण किया गया। साहित्य समीक्षा से स्पष्ट हुआ कि अधिकांश शिक्षक प्रशिक्षकों का कंप्यूटर आधारित शिक्षण के प्रति दृष्टिकोण सकारात्मक है। वे मानते हैं कि कंप्यूटर शिक्षण को अधिक प्रभावी, विद्यार्थी-केंद्रित, सहभागितापूर्ण तथा नवाचारपरक बनाता है। साथ ही, ICT प्रशिक्षण, डिजिटल दक्षता, संस्थागत सहयोग, आधुनिक डिजिटल अवसंरचना तथा तकनीकी सहायता कंप्यूटर के प्रभावी उपयोग के प्रमुख निर्धारक हैं। दूसरी ओर, तकनीकी संसाधनों की कमी, इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या, अपर्याप्त प्रशिक्षण, डिजिटल विभाजन तथा तकनीकी सहायता का अभाव प्रमुख चुनौतियों के रूप में सामने आए। अध्ययन से निष्कर्ष निकलता है कि शिक्षक शिक्षा संस्थानों में नियमित ICT प्रशिक्षण, स्मार्ट कक्षाओं का विकास, उच्च गति इंटरनेट, डिजिटल शिक्षण संसाधनों की उपलब्धता तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी उभरती शैक्षिक तकनीकों का समावेश आवश्यक है। इन उपायों से शिक्षक प्रशिक्षकों की डिजिटल दक्षता एवं शिक्षण प्रभावशीलता में वृद्धि होगी तथा शिक्षण एवं अधिगम प्रक्रिया अधिक गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और प्रौद्योगिकी-सक्षम बन सकेगी।

मुख्य शब्द: शिक्षक प्रशिक्षक, कंप्यूटर आधारित शिक्षण, ICT, शिक्षक शिक्षा, डिजिटल शिक्षण, समीक्षात्मक अध्ययन

1. प्रस्तावना

21वीं शताब्दी को सूचना, ज्ञान एवं डिजिटल प्रौद्योगिकी का युग माना जाता है, जिसमें शिक्षा प्रणाली तीव्र गति से पारंपरिक शिक्षण से प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षण की ओर अग्रसर हो रही है। कंप्यूटर एवं सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के विकास ने शिक्षण एवं अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, सहभागितापूर्ण, लचीला तथा विद्यार्थी-केंद्रित बनाया है। आज स्मार्ट कक्षाएँ, -लर्निंग, ब्लेंडेड लर्निंग, डिजिटल शिक्षण सामग्री, ऑनलाइन मूल्यांकन तथा वर्चुअल प्रयोगशालाएँ शिक्षा के अभिन्न अंग बन चुके हैं। इन तकनीकों के माध्यम से विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, रचनात्मकता, समस्या-समाधान कौशल तथा स्व-अधिगम को प्रोत्साहन मिला है।

शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक प्रशिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे भावी शिक्षकों को विषयगत ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक शिक्षण कौशल, डिजिटल दक्षता तथा तकनीकी नवाचारों के उपयोग के लिए तैयार करते हैं। शिक्षक प्रशिक्षकों का कंप्यूटर के प्रति दृष्टिकोण, उनकी तकनीकी दक्षता तथा डिजिटल शिक्षण के प्रति स्वीकृति, शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों की गुणवत्ता एवं प्रभावशीलता को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। यदि शिक्षक प्रशिक्षक तकनीकी रूप से दक्ष एवं सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं, तो वे भावी शिक्षकों को कंप्यूटर आधारित शिक्षण विधियों के प्रभावी उपयोग के लिए सक्षम बना सकते हैं।

वर्तमान समय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने भी शिक्षा के डिजिटलीकरण, ICT के एकीकरण, डिजिटल साक्षरता तथा प्रौद्योगिकी-आधारित शिक्षण को विशेष महत्व दिया है। साथ ही, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS), ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफ़ॉर्म तथा अन्य उभरती डिजिटल तकनीकों ने शिक्षक शिक्षा के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन किया है। ऐसे परिवर्तित शैक्षिक परिदृश्य में शिक्षक प्रशिक्षकों के दृष्टिकोण का अध्ययन अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है, क्योंकि यही दृष्टिकोण शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में कंप्यूटर के प्रभावी उपयोग को निर्धारित करता है।इसी संदर्भ में प्रस्तुत समीक्षात्मक अध्ययन का उद्देश्य शिक्षण एवं अधिगम प्रक्रिया में कंप्यूटर के उपयोग के प्रति शिक्षक प्रशिक्षकों के दृष्टिकोण, उसकी उपयोगिता, प्रमुख लाभ, चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं का उपलब्ध साहित्य के आधार पर समग्र एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करना है।

 

2. अध्ययन का उद्देश्य

इस समीक्षात्मक अध्ययन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  1. शिक्षण एवं सीखने की प्रक्रिया में कंप्यूटर के उपयोग की अवधारणा का विश्लेषण करना।
  2. शिक्षक प्रशिक्षकों के दृष्टिकोण से संबंधित उपलब्ध शोधों की समीक्षा करना।
  3. कंप्यूटर आधारित शिक्षण के लाभ एवं चुनौतियों का विश्लेषण करना।
  4. शिक्षक शिक्षा में कंप्यूटर के प्रभावी उपयोग हेतु सुझाव प्रस्तुत करना।

 

3. अनुसंधान पद्धति

प्रस्तुत अध्ययन एक समीक्षात्मक शोध है, जो पूर्णतः द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है। अध्ययन के लिए वर्ष 2015 से 2025 के मध्य प्रकाशित प्रासंगिक साहित्य का चयन कर उसका विषयवस्तु विश्लेषण किया गया। साहित्य संग्रह हेतु यूजीसी-केयर (UGC CARE) सूचीबद्ध शोध पत्रिकाओं, ईआरआईसी (ERIC), गूगल स्कॉलर (Google Scholar), स्कोपस (Scopus) सूचीबद्ध शोध पत्रिकाओं, वेब ऑफ साइंस (Web of Science), शोधगंगा, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की रिपोर्टों, राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 तथा यूनेस्को (UNESCO) की रिपोर्टों का उपयोग किया गया। चयनित साहित्य का विश्लेषण शिक्षक प्रशिक्षकों के दृष्टिकोण, शिक्षण एवं अधिगम प्रक्रिया में कंप्यूटर के उपयोग, इसके लाभ, चुनौतियों तथा प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित प्रमुख निष्कर्षों के आधार पर किया गया।

 

4. शिक्षण एवं अधिगम में कंप्यूटर की भूमिका

वर्तमान डिजिटल युग में कंप्यूटर शिक्षण एवं अधिगम प्रक्रिया का एक अनिवार्य अंग बन गया है। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के विकास ने पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों को अधिक प्रभावी, संवादात्मक तथा विद्यार्थी-केंद्रित बनाया है। कंप्यूटर के माध्यम से स्मार्ट कक्षाओं का संचालन, डिजिटल शिक्षण सामग्री का निर्माण, -लर्निंग, ब्लेंडेड लर्निंग, ऑनलाइन मूल्यांकन, मल्टीमीडिया आधारित शिक्षण, वर्चुअल प्रयोगशालाओं तथा व्यक्तिगत अधिगम (Personalized Learning) जैसी नवीन शिक्षण रणनीतियों को सफलतापूर्वक अपनाया जा रहा है। इन तकनीकों के उपयोग से विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता, स्व-निर्देशित अधिगम, समस्या-समाधान क्षमता तथा सीखने की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है। गेलाद्ज़े (2015) के अनुसार इंटरनेट एवं कंप्यूटर प्रौद्योगिकियाँ शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक सुलभ, प्रभावी तथा ज्ञान-केंद्रित बनाती हैं। स्टीफेंसन (2018) ने ऑनलाइन शिक्षण एवं नई शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से शिक्षार्थी-केंद्रित अधिगम और लचीले शिक्षण वातावरण के विकास पर बल दिया है। इसी प्रकार शाहिद आदि (2019) ने निष्कर्ष निकाला कि कंप्यूटर आधारित तकनीकी उपकरण शिक्षण की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की सहभागिता तथा अधिगम परिणामों में महत्वपूर्ण वृद्धि करते हैं। अतः स्पष्ट है कि कंप्यूटर का प्रभावी उपयोग शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक नवाचारी, आकर्षक एवं परिणामोन्मुख बनाता है।

 

5. शिक्षक प्रशिक्षकों का दृष्टिकोण

साहित्य समीक्षा से स्पष्ट होता है कि शिक्षण एवं अधिगम प्रक्रिया में कंप्यूटर के उपयोग के प्रति शिक्षक प्रशिक्षकों का दृष्टिकोण शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता और तकनीकी एकीकरण की सफलता का महत्वपूर्ण निर्धारक है। अधिकांश अध्ययनों में पाया गया है कि शिक्षक प्रशिक्षक कंप्यूटर आधारित शिक्षण को समकालीन शिक्षा की आवश्यकता मानते हैं तथा इसे प्रभावी शिक्षण, नवाचार और व्यावसायिक विकास का सशक्त माध्यम स्वीकार करते हैं।

(i) सकारात्मक दृष्टिकोण: शिक्षक प्रशिक्षकों का मानना है कि कंप्यूटर आधारित शिक्षण से शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होता है, विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ती है, सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी एवं रोचक बनती है तथा शिक्षण-अधिगम के अपेक्षित परिणाम प्राप्त करने में सहायता मिलती है। मरे (2017) के अनुसार शिक्षक प्रशिक्षकों की भूमिका केवल विषय-ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें भावी शिक्षकों में तकनीकी दक्षता एवं नवाचार-आधारित शिक्षण कौशल का भी विकास करना चाहिए। कोचरन-स्मिथ आदि (2020) ने भी शिक्षक प्रशिक्षकों को शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन के प्रमुख अभिकर्ता (change agents) माना है, जो डिजिटल शिक्षण संस्कृति को बढ़ावा देते हैं।

(ii) तकनीकी दक्षता: उपलब्ध अध्ययनों से ज्ञात होता है कि जिन शिक्षक प्रशिक्षकों को ICT एवं डिजिटल शिक्षण का समुचित प्रशिक्षण प्राप्त होता है, वे कंप्यूटर आधारित शिक्षण को अधिक प्रभावी ढंग से अपनाते हैं। उनकी तकनीकी दक्षता, आत्मविश्वास तथा नवीन शिक्षण विधियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपेक्षाकृत अधिक विकसित होता है, जिससे शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों में ICT का सफल एकीकरण संभव हो पाता है (रिक्टर2021)

(iii) संस्थागत समर्थन: कंप्यूटर प्रयोगशालाओं, उच्च गति इंटरनेट, स्मार्ट बोर्ड, डिजिटल पुस्तकालय तथा तकनीकी सहायता जैसी संस्थागत सुविधाएँ शिक्षक प्रशिक्षकों के दृष्टिकोण को सकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। पर्याप्त डिजिटल संसाधनों वाले संस्थानों में शिक्षक प्रशिक्षक कंप्यूटर आधारित शिक्षण विधियों का अधिक प्रभावी एवं नियमित उपयोग करते हैं, जिससे शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि होती है कोचरन-स्मि., 2020)

(iv) अनुभव का प्रभाव: साहित्य से यह भी स्पष्ट होता है कि अपेक्षाकृत युवा शिक्षक प्रशिक्षक नई डिजिटल तकनीकों को अपनाने के प्रति अधिक उत्साही होते हैं, जबकि अनुभवी शिक्षक प्रशिक्षकों में तकनीकी अनुकूलन की गति अपेक्षाकृत धीमी हो सकती है। तथापि, उपयुक्त प्रशिक्षण, सतत व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों तथा संस्थागत सहयोग के माध्यम से इस अंतर को कम किया जा सकता है। रिक्टर (2021) के अनुसार शिक्षक प्रशिक्षकों की व्यावसायिक पहचान, कार्य-दृष्टिकोण तथा शिक्षण व्यवहार डिजिटल तकनीकों के प्रभावी उपयोग को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं।

 

6. साहित्य समीक्षा

शिक्षण एवं अधिगम प्रक्रिया में कंप्यूटर एवं सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के उपयोग के संबंध में विगत एक दशक में अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अध्ययन किए गए हैं। इन अध्ययनों में मुख्यतः शिक्षक एवं शिक्षक प्रशिक्षकों के दृष्टिकोण, तकनीकी दक्षता, ICT के एकीकरण, डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता तथा कंप्यूटर आधारित शिक्षण के समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है। प्रस्तुत अध्ययन से संबंधित प्रमुख शोधों की समीक्षा निम्नानुसार है

सफ़ित्री, मंतोरो, आयु, मायूमी, देवंती और अज़मीला (2015) ने कक्षा शिक्षण में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के उपयोग के प्रति शिक्षकों के दृष्टिकोण एवं व्यवहार का अध्ययन किया। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि शिक्षक ICT के उपयोग को किस प्रकार देखते हैं तथा व्यवहार में उसका कितना उपयोग करते हैं। इसके लिए संशोधित Technology Implementation Questionnaire (TIQ) के माध्यम से इंडोनेशिया के वेस्ट जावा प्रांत के 20 प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों से आँकड़े एकत्रित किए गए। अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश शिक्षक ICT को शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करने वाला प्रभावी माध्यम मानते हैं तथा कक्षा शिक्षण में इसके उपयोग के प्रति उनका दृष्टिकोण सकारात्मक है। यद्यपि कई शिक्षक दस वर्ष से अधिक का शिक्षण अनुभव रखते थे, फिर भी उन्हें ICT के उपयोग का औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त नहीं हुआ था। इसके अतिरिक्त विद्यालयों में तकनीकी सहायता एवं आवश्यक संसाधनों की कमी भी सामने आई। शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि केवल सकारात्मक दृष्टिकोण पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावी ICT एकीकरण के लिए नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता तथा संस्थागत सहयोग भी अनिवार्य है।

गेब्रेमेधिन और फेंटा (2015) ने इथियोपिया के अदवा कॉलेज में शिक्षकों की ICT के प्रति धारणा तथा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में इसके एकीकरण का अध्ययन किया। अध्ययन में 72 शिक्षकों को शामिल किया गया तथा हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर के उपयोग, व्यावसायिक विकास, तकनीकी सहायता, आत्म-प्रभावकारिता तथा ICT उपयोग में आने वाली बाधाओं का विश्लेषण किया गया। अध्ययन के निष्कर्षों से ज्ञात हुआ कि अधिकांश शिक्षक ICT के उपयोग के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते थे, किंतु संसाधनों की कमी के कारण वे कक्षा शिक्षण में कंप्यूटर का प्रभावी उपयोग नहीं कर पा रहे थे। लगभग 55.6 प्रतिशत शिक्षक ICT को शिक्षण उपकरण के रूप में उपयोग करने में सक्षम नहीं थे। तकनीकी सहायता की अपर्याप्त उपलब्धता तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों की कमी भी प्रमुख बाधाएँ थीं। शोध में यह भी पाया गया कि ICT उपयोग को प्रोत्साहित करने वाले कारकों एवं शिक्षकों की धारणा के मध्य सार्थक सकारात्मक सहसंबंध (r = 0.412) विद्यमान था। इसी प्रकार ICT के उपयोग तथा शिक्षण की गुणवत्ता एवं उत्पादकता के मध्य भी महत्वपूर्ण संबंध (r = 0.615) पाया गया। अध्ययन ने यह स्पष्ट किया कि केवल कंप्यूटर उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षकों की तकनीकी दक्षता का विकास तथा प्रत्येक पाठ्यक्रम में ICT का समुचित एकीकरण आवश्यक है।

घविफेकर, कुंजप्पन, रामासामी और एंथोनी (2016) ने मलेशिया के माध्यमिक विद्यालयों में ICT उपकरणों के उपयोग से संबंधित शिक्षकों की धारणाओं तथा उनके समक्ष आने वाली चुनौतियों का अध्ययन किया। इस मात्रात्मक अध्ययन में 100 माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को शामिल किया गया। अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि शिक्षक ICT आधारित शिक्षण को 21वीं सदी के कौशलों के विकास के लिए आवश्यक मानते हैं, किंतु इसके प्रभावी उपयोग में अनेक व्यावहारिक कठिनाइयाँ सामने आती हैं। सीमित इंटरनेट कनेक्टिविटी, अपर्याप्त तकनीकी सहायता, प्रभावी प्रशिक्षण का अभाव, समय की कमी तथा शिक्षकों की तकनीकी दक्षता की कमी प्रमुख चुनौतियाँ थीं। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि ICT उपकरणों का उपयोग पुरुष शिक्षकों द्वारा महिलाओं की तुलना में थोड़ा अधिक किया जा रहा था, यद्यपि यह अंतर बहुत अधिक नहीं था। अध्ययन ने सुझाव दिया कि डिजिटल अवसंरचना के विकास के साथ-साथ नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं तकनीकी सहयोग की व्यवस्था करना आवश्यक है, जिससे शिक्षकों द्वारा ICT का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

ज़ियाद (2016) ने मोरक्को के माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के ICT के प्रति दृष्टिकोण तथा कंप्यूटर आधारित शिक्षण के समक्ष आने वाली बाधाओं का अध्ययन किया। अध्ययन में Technology Acceptance Model (TAM) के आधार पर मिश्रित अनुसंधान पद्धति (Mixed Methods) का उपयोग किया गया। अध्ययन के परिणामों से ज्ञात हुआ कि अधिकांश शिक्षक ICT के उपयोग के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं तथा इसे शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करने वाला महत्वपूर्ण साधन मानते हैं। इसके बावजूद वास्तविक कक्षा शिक्षण में ICT का उपयोग अपेक्षाकृत सीमित पाया गया। इसका मुख्य कारण पाठ्यचर्या संबंधी बाधाएँ, अपर्याप्त तकनीकी अवसंरचना, संसाधनों की कमी, तकनीकी सहायता का अभाव तथा प्रशासनिक एवं व्यवस्थागत कठिनाइयाँ थीं। अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला कि यदि इन संस्थागत एवं संरचनात्मक बाधाओं को दूर किया जाए, तो शिक्षकों की सकारात्मक मनोवृत्ति ICT के प्रभावी उपयोग में परिवर्तित हो सकती है। साथ ही, शोधकर्ताओं ने शिक्षक प्रशिक्षण, नीति-निर्माण तथा डिजिटल अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल दिया। उपरोक्त अध्ययनों से स्पष्ट होता है कि वर्ष 2015–2016 के अधिकांश शोधों में शिक्षकों का ICT एवं कंप्यूटर आधारित शिक्षण के प्रति दृष्टिकोण सकारात्मक पाया गया, किंतु तकनीकी संसाधनों की कमी, अपर्याप्त प्रशिक्षण, इंटरनेट सुविधा का अभाव तथा संस्थागत सहयोग की सीमाएँ इसके प्रभावी कार्यान्वयन में प्रमुख बाधाओं के रूप में उभरकर सामने आईं। इन अध्ययनों ने यह स्थापित किया कि केवल तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है; उनके प्रभावी उपयोग के लिए शिक्षकों की डिजिटल दक्षता, निरंतर व्यावसायिक विकास तथा संस्थागत समर्थन भी समान रूप से आवश्यक हैं।

ओज़पिनार (2020) ने तुर्की के एक राज्य विश्वविद्यालय में प्राथमिक गणित शिक्षा के 24 शिक्षक-प्रशिक्षुओं (Pre-service Teachers) पर अध्ययन किया, जिसका उद्देश्य Web 2.0 आधारित डिजिटल उपकरणों के उपयोग तथा वास्तविक कक्षा शिक्षण में उनके अनुभवों का विश्लेषण करना था। अध्ययन में Plickers, Kahoot, Edmodo तथा ZipGrade जैसे Web 2.0 उपकरणों का उपयोग कर शिक्षक-प्रशिक्षुओं द्वारा पाठ योजनाएँ तैयार कर वास्तविक कक्षाओं में उनका प्रयोग कराया गया। अध्ययन के निष्कर्षों से ज्ञात हुआ कि Web 2.0 उपकरणों के प्रयोग से शिक्षक-प्रशिक्षुओं के व्यावसायिक कौशल, पाठ नियोजन क्षमता तथा डिजिटल दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। विद्यार्थियों के दृष्टिकोण से इन उपकरणों ने अधिगम को अधिक रुचिकर, सहभागी एवं कौशल-आधारित बनाया। इसके अतिरिक्त छात्र-शिक्षक-अभिभावक के मध्य संचार एवं सहयोग में भी वृद्धि देखी गई। हालांकि, इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा डिजिटल उपकरणों की उपलब्धता को इन तकनीकों के प्रभावी उपयोग में प्रमुख बाधा के रूप में चिन्हित किया गया। अध्ययन में सुझाव दिया गया कि शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों में Web 2.0 आधारित तकनीकों का व्यवस्थित प्रशिक्षण सम्मिलित किया जाना चाहिए, जिससे भावी शिक्षक डिजिटल शिक्षण के लिए अधिक सक्षम बन सकें।

हेरो, विसेर और कियान (2021) ने संयुक्त राज्य अमेरिका के एक शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम में Teacher Education Technology Competencies (TETCs) के संदर्भ में शिक्षक प्रशिक्षकों के दृष्टिकोण एवं व्यवहार का मिश्रित अनुसंधान पद्धति (Mixed Methods) द्वारा अध्ययन किया। अध्ययन में 17 शिक्षक प्रशिक्षकों से प्रश्नावली एवं साक्षात्कार के माध्यम से जानकारी एकत्रित की गई। निष्कर्षों से स्पष्ट हुआ कि अधिकांश शिक्षक प्रशिक्षक TETCs को शिक्षक शिक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं, किन्तु उनके वास्तविक शिक्षण व्यवहार एवं तकनीकी एकीकरण में अपेक्षित स्तर का सामंजस्य नहीं पाया गया। जिन शिक्षक प्रशिक्षकों की तकनीकी दक्षता अधिक थी, उनमें TETCs के प्रति विश्वास तथा व्यवहारिक अनुप्रयोग भी अधिक प्रभावी पाया गया। अध्ययन ने शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों के पुनर्गठन, सतत व्यावसायिक विकास तथा तकनीकी दक्षता को शिक्षक प्रशिक्षण का अभिन्न अंग बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

सिखखाने, गोवेंडर और मफलाला (2021) ने दक्षिण अफ्रीका के माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में कंप्यूटर के उपयोग के प्रति शिक्षकों के दृष्टिकोण का गुणात्मक अध्ययन किया। अर्द्ध-संरचित साक्षात्कार एवं कक्षा अवलोकन के माध्यम से प्राप्त निष्कर्षों से ज्ञात हुआ कि शिक्षक कंप्यूटर को प्रभावी शिक्षण का महत्वपूर्ण साधन मानते हैं, क्योंकि इससे विद्यार्थियों की सहभागिता, अधिगम की गुणवत्ता तथा विषयवस्तु की समझ में सुधार होता है। इसके बावजूद विद्यालयों में कंप्यूटर का उपयोग अनियमित एवं सीमित पाया गया। अध्ययन में सुझाव दिया गया कि शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में Technological Pedagogical Educational Psychology and Content Domain (TPEPCD) मॉडल को अपनाकर शिक्षकों की तकनीकी दक्षता का विकास किया जाना चाहिए, जिससे वे चौथी औद्योगिक क्रांति (Fourth Industrial Revolution) की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण कर सकें।

अकरम, अब्देलराडी, अल-अदवान और रमज़ान (2022) ने पाकिस्तान में पिछले पाँच वर्षों के शोधों का व्यवस्थित साहित्य समीक्षा (Systematic Review) के माध्यम से विश्लेषण किया। अध्ययन का उद्देश्य शिक्षकों की तकनीकी एकीकरण के प्रति धारणा तथा उसके प्रभाव को समझना था। समीक्षा से स्पष्ट हुआ कि अधिकांश शिक्षक ICT आधारित शिक्षण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं तथा उनका मानना है कि तकनीक शिक्षण को अधिक प्रभावी, संवादात्मक एवं प्रेरणादायक बनाती है। तकनीकी एकीकरण से विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता, सीखने की रुचि तथा अधिगम परिणामों में सुधार देखा गया। दूसरी ओर, धीमी इंटरनेट गति, विद्युत आपूर्ति की समस्या, अपर्याप्त अवसंरचना, सीमित प्रशिक्षण तथा ऑनलाइन शिक्षण अनुभव की कमी प्रमुख चुनौतियों के रूप में सामने आई। अध्ययन ने सरकार एवं शैक्षणिक संस्थानों को ICT अवसंरचना के विकास, पर्याप्त बजट आवंटन तथा शिक्षकों के व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने की अनुशंसा की।

अल-अदवान, मीत, काला, समेडली, अर्बानिकोवा और अल-रहमी (2024) ने जॉर्डन के 657 उच्च शिक्षा शिक्षकों पर Technology Acceptance Model (TAM) के संशोधित स्वरूप एवं PLS-SEM तकनीक का उपयोग करते हुए अध्ययन किया। शोध का उद्देश्य उच्च शिक्षा में शैक्षिक प्रौद्योगिकी के प्रभावी एकीकरण को प्रभावित करने वाले कारकों की पहचान करना था। अध्ययन में पाया गया कि शिक्षकों का Technological Pedagogical Content Knowledge (TPACK) तकनीकी एकीकरण का सबसे महत्वपूर्ण निर्धारक है। उच्च TPACK वाले शिक्षकों में आत्म-प्रभावकारिता, नवाचार अपनाने की प्रवृत्ति तथा तकनीक की उपयोगिता एवं सरलता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अधिक पाया गया। इसके विपरीत Technostress तथा पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों के प्रति अत्यधिक निर्भरता तकनीकी एकीकरण में प्रमुख बाधाएँ सिद्ध हुईं। अध्ययन ने निष्कर्ष दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में तकनीकी दक्षता आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

मिंगा (2024) ने तंज़ानिया के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में ICT के उपयोग के संबंध में उपलब्ध अध्ययनों की समीक्षा प्रस्तुत की। अध्ययन से ज्ञात हुआ कि अधिकांश शिक्षक ICT को शिक्षण की प्रभावशीलता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण माध्यम मानते हैं। ICT के उपयोग से विद्यार्थियों की अवधारणात्मक समझ, दीर्घकालिक अधिगम, रचनात्मक चिंतन तथा शिक्षक-विद्यार्थी अंतःक्रिया में सकारात्मक सुधार देखा गया। हालांकि, सीमित डिजिटल संसाधन, इंटरनेट सुविधा की कमी तथा आर्थिक प्रतिबंध इसके प्रभावी कार्यान्वयन में प्रमुख चुनौतियाँ थीं। अध्ययन में लचीली शिक्षण रणनीतियों, आजीवन अधिगम तथा ICT के समग्र एकीकरण पर बल दिया गया।

शर्मा, विरानी और रौतेला (2025) ने महामारी के पश्चात डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग तथा शिक्षकों के व्यावसायिक विकास पर उसके प्रभाव का अध्ययन किया। 279 शिक्षकों से प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण Confirmatory Factor Analysis (CFA) तथा Structural Equation Modelling (SEM) के माध्यम से किया गया। अध्ययन में पाया गया कि डिजिटल शिक्षण तकनीक, डिजिटल दक्षता तथा तकनीकी एवं प्रशासनिक सहयोग शिक्षकों के व्यावसायिक विकास को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं। साथ ही, शिक्षकों की तकनीकी दक्षता डिजिटल शिक्षण एवं व्यावसायिक विकास के मध्य मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाती है। अध्ययन ने यह स्पष्ट किया कि प्रभावी डिजिटल शिक्षा के लिए केवल तकनीक उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षकों की डिजिटल क्षमता का विकास भी आवश्यक है।

उपाध्याय एवं रिमझिम (2025) ने असम के एक विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के दृष्टिकोण से ICT उपकरणों के उपयोग तथा उससे संबंधित चुनौतियों का अध्ययन किया। अध्ययन में पाया गया कि ICT उपकरणों के उपयोग से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया अधिक प्रभावी, लचीली तथा सहभागितापूर्ण बनी। साथ ही, अध्ययन ने यह भी स्पष्ट किया कि अपर्याप्त प्रशिक्षण, तकनीकी संसाधनों की सीमित उपलब्धता तथा डिजिटल अवसंरचना की कमी ICT के प्रभावी उपयोग में प्रमुख बाधाएँ हैं। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों को ICT आधारित प्रशिक्षण एवं संसाधनों के विकास हेतु स्पष्ट नीतियाँ विकसित करनी चाहिए।

शाही (2025) ने अंग्रेजी भाषा शिक्षण (ELT) में ICT आधारित शिक्षण-अधिगम उपकरणों की भूमिका का समीक्षा-आधारित अध्ययन प्रस्तुत किया। अध्ययन के अनुसार कंप्यूटर, मोबाइल उपकरण, टैबलेट, इंटरैक्टिव व्हाइटबोर्ड, डिजिटल रिकॉर्डर तथा मोबाइल-असिस्टेड लैंग्वेज लर्निंग (MALL) जैसे ICT उपकरण शिक्षण को अधिक संवादात्मक, सहयोगात्मक एवं शिक्षार्थी-केंद्रित बनाते हैं। इन तकनीकों से विद्यार्थियों को किसी भी समय एवं स्थान पर अधिगम संसाधनों तक पहुँच प्राप्त होती है, जिससे स्व-निर्देशित अधिगम, आलोचनात्मक चिंतन तथा भाषा अधिगम की गुणवत्ता में वृद्धि होती है। अध्ययन में यह भी उल्लेख किया गया कि ICT के प्रभावी उपयोग के लिए डिजिटल अवसंरचना, शिक्षक प्रशिक्षण तथा सभी हितधारकों में जागरूकता विकसित करना आवश्यक है।

उपरोक्त सभी अध्ययनों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षण एवं अधिगम प्रक्रिया में कंप्यूटर तथा ICT का प्रभावी उपयोग मुख्यतः शिक्षक एवं शिक्षक प्रशिक्षकों के दृष्टिकोण, तकनीकी दक्षता, डिजिटल अवसंरचना तथा संस्थागत सहयोग पर निर्भर करता है। अधिकांश अध्ययनों में शिक्षकों का दृष्टिकोण कंप्यूटर आधारित शिक्षण के प्रति सकारात्मक पाया गया, क्योंकि इससे शिक्षण अधिक प्रभावी, विद्यार्थी-केंद्रित, सहभागितापूर्ण तथा नवाचारपरक बनता है। दूसरी ओर, तकनीकी संसाधनों की कमी, इंटरनेट कनेक्टिविटी, ICT प्रशिक्षण का अभाव, तकनीकी सहायता की सीमित उपलब्धता, टेक्नोस्ट्रेस तथा परिवर्तन के प्रति प्रतिरोध जैसी समस्याएँ इसके सफल क्रियान्वयन में प्रमुख बाधाओं के रूप में सामने आई हैं। इन निष्कर्षों से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षक शिक्षा संस्थानों में डिजिटल दक्षताओं का विकास, निरंतर व्यावसायिक प्रशिक्षण तथा आधुनिक तकनीकी अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में कंप्यूटर के प्रभावी एवं सतत उपयोग के लिए अत्यंत आवश्यक है।

 

7. कंप्यूटर आधारित शिक्षण के लाभ

साहित्य समीक्षा से स्पष्ट होता है कि कंप्यूटर आधारित शिक्षण (Computer-Based Learning) शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, लचीला तथा विद्यार्थी-केंद्रित बनाता है। यह न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को बढ़ावा देता है, बल्कि विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता, स्व-अधिगम क्षमता तथा उच्च स्तरीय संज्ञानात्मक कौशल के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कंप्यूटर आधारित शिक्षण के माध्यम से शिक्षार्थियों को विविध डिजिटल संसाधनों तक सरल पहुँच, सहयोगात्मक अधिगम (Collaborative Learning), त्वरित प्रतिपुष्टि (Immediate Feedback) तथा व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप सीखने के अवसर प्राप्त होते हैं। साथ ही, ऑनलाइन मूल्यांकन एवं स्वचालित प्रतिपुष्टि के कारण अधिगम की प्रगति का समयबद्ध आकलन संभव होता है, जिससे सीखने की गुणवत्ता में निरंतर सुधार होता है।

किम, एन. जे (2018) के मेटा-विश्लेषण से ज्ञात हुआ कि कंप्यूटर-आधारित स्कैफोल्डिंग (Computer-Based Scaffolding) समस्या-आधारित अधिगम (Problem-Based Learning) में विद्यार्थियों की उपलब्धि, आलोचनात्मक चिंतन तथा समस्या-समाधान क्षमता को प्रभावी रूप से बढ़ाती है। वान डेर क्लीज  (2015) ने अपने मेटा-विश्लेषण में निष्कर्ष निकाला कि कंप्यूटर आधारित अधिगम वातावरण में प्रदान की गई त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण प्रतिपुष्टि विद्यार्थियों के अधिगम परिणामों में उल्लेखनीय सुधार करती है। इसी प्रकार शूट, वी. जे., और रहीमी (2017) के अनुसार कंप्यूटर आधारित मूल्यांकन प्रणाली सीखने की प्रगति का सतत आकलन करने, व्यक्तिगत प्रतिपुष्टि प्रदान करने तथा शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक है। र्टेनस, यू., फिन, बी. (2022) ने भी यह प्रतिपादित किया कि कंप्यूटर आधारित प्रतिपुष्टि निम्न एवं उच्च दोनों स्तरों के अधिगम परिणामों में सकारात्मक प्रभाव डालती है तथा विद्यार्थियों की संज्ञानात्मक उपलब्धि को सुदृढ़ करती है।

इस प्रकार समीक्षा से यह निष्कर्ष निकलता है कि कंप्यूटर आधारित शिक्षण गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ विद्यार्थी-केंद्रित अधिगम, सक्रिय सहभागिता, समय की बचत, त्वरित मूल्यांकन, डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता, ऑनलाइन सहयोग, रचनात्मकता के विकास तथा स्व-अधिगम को प्रभावी रूप से प्रोत्साहित करता है।

 

8. प्रमुख चुनौतियाँ

यद्यपि कंप्यूटर आधारित शिक्षण ने शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, लचीला एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाया है, फिर भी इसके प्रभावी क्रियान्वयन के समक्ष अनेक व्यावहारिक एवं संस्थागत चुनौतियाँ विद्यमान हैं। विशेष रूप से विकासशील देशों में तकनीकी अवसंरचना की कमी, सीमित इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा अनियमित विद्युत आपूर्ति डिजिटल शिक्षण की निरंतरता को प्रभावित करती है। इसके अतिरिक्त, अनेक शिक्षक एवं शिक्षक प्रशिक्षक पर्याप्त ICT प्रशिक्षण के अभाव में उपलब्ध डिजिटल संसाधनों का प्रभावी उपयोग नहीं कर पाते, जिससे शिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

कई शैक्षणिक संस्थानों में तकनीकी सहायता एवं रखरखाव (Technical Support) की अपर्याप्त व्यवस्था भी कंप्यूटर आधारित शिक्षण के सफल क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न करती है। साथ ही, पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों के प्रति झुकाव तथा नई तकनीकों को अपनाने में अनिच्छा (Resistance to Change) डिजिटल नवाचार की गति को धीमा करती है। डिजिटल विभाजन (Digital Divide) के कारण सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को समान तकनीकी संसाधन और इंटरनेट सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हो पातीं, जिससे शैक्षिक असमानता बढ़ने की संभावना रहती है। इसके अतिरिक्त, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता, ऑनलाइन धोखाधड़ी तथा डिजिटल नैतिकता से संबंधित चुनौतियाँ भी कंप्यूटर आधारित शिक्षण के सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग के लिए महत्वपूर्ण चिंता का विषय हैं।

अतः कंप्यूटर आधारित शिक्षण के व्यापक एवं सफल कार्यान्वयन के लिए सुदृढ़ डिजिटल अवसंरचना, विश्वसनीय इंटरनेट एवं विद्युत सुविधा, नियमित ICT प्रशिक्षण, प्रभावी तकनीकी सहायता, साइबर सुरक्षा उपायों तथा डिजिटल समावेशन को सुनिश्चित करना आवश्यक है।

9. विश्लेषण

प्रस्तुत साहित्य समीक्षा के समग्र विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि शिक्षण एवं अधिगम प्रक्रिया में कंप्यूटर तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का प्रभावी एकीकरण केवल तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर नहीं करता, बल्कि शिक्षक प्रशिक्षकों के दृष्टिकोण, डिजिटल दक्षता, व्यावसायिक प्रशिक्षण, संस्थागत सहयोग तथा तकनीकी अवसंरचना पर समान रूप से आधारित है। अधिकांश राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में यह पाया गया कि शिक्षक प्रशिक्षक एवं शिक्षक कंप्यूटर आधारित शिक्षण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं तथा इसे गुणवत्तापूर्ण, विद्यार्थी-केंद्रित एवं नवाचारपरक शिक्षा का प्रभावी माध्यम मानते हैं। कंप्यूटर आधारित शिक्षण विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता, सहयोगात्मक अधिगम, स्व-अधिगम, रचनात्मकता तथा आलोचनात्मक चिंतन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

साहित्य से यह भी स्पष्ट होता है कि जिन शिक्षक प्रशिक्षकों को ICT, डिजिटल शिक्षण पद्धतियों तथा आधुनिक शैक्षिक प्रौद्योगिकियों का समुचित प्रशिक्षण प्राप्त हुआ है, वे कंप्यूटर आधारित शिक्षण का अधिक प्रभावी एवं आत्मविश्वासपूर्ण उपयोग करते हैं। इसके विपरीत, तकनीकी ज्ञान का अभाव, सीमित डिजिटल दक्षता तथा नई तकनीकों को अपनाने में झिझक कंप्यूटर के प्रभावी उपयोग में प्रमुख बाधाएँ बनती हैं। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों में केवल तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षक प्रशिक्षकों की डिजिटल क्षमता का निरंतर विकास भी अत्यंत आवश्यक है।

अध्ययनों से यह भी ज्ञात होता है कि संस्थागत सहयोग कंप्यूटर आधारित शिक्षण की सफलता का एक महत्वपूर्ण निर्धारक है। जिन शिक्षक शिक्षा संस्थानों में स्मार्ट कक्षाएँ, कंप्यूटर प्रयोगशालाएँ, उच्च गति इंटरनेट, डिजिटल पुस्तकालय, तकनीकी सहायता सेवाएँ तथा नियमित ICT प्रशिक्षण उपलब्ध हैं, वहाँ शिक्षक प्रशिक्षकों का दृष्टिकोण अधिक सकारात्मक तथा तकनीकी उपयोग अधिक प्रभावी पाया गया। इसके विपरीत, संसाधनों की कमी, इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या, अपर्याप्त तकनीकी सहायता, अनियमित विद्युत आपूर्ति तथा डिजिटल अवसंरचना की सीमाएँ ICT के सफल क्रियान्वयन में प्रमुख बाधाओं के रूप में सामने आई हैं।

साहित्य समीक्षा यह भी इंगित करती है कि आधुनिक शिक्षक शिक्षा में Technological Pedagogical Content Knowledge (TPACK), Technology Education Technology Competencies (TETCs) तथा Web 2.0 आधारित शिक्षण उपकरणों का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। इन अवधारणाओं के माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षकों की तकनीकी दक्षता, नवाचार क्षमता तथा शिक्षण प्रभावशीलता में वृद्धि होती है। साथ ही, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), ऑनलाइन अधिगम एवं मिश्रित शिक्षण (Blended Learning) भविष्य की शिक्षक शिक्षा के प्रमुख आयाम बनते जा रहे हैं।

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) ने भी शिक्षक शिक्षा में ICT आधारित शिक्षण, डिजिटल साक्षरता, ऑनलाइन शिक्षण संसाधनों के विकास तथा तकनीकी दक्षता को विशेष महत्व प्रदान किया है। नीति में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षक एवं शिक्षक प्रशिक्षकों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के उपयोग में दक्ष बनाया जाना आवश्यक है। अतः शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में आधुनिक डिजिटल अवसंरचना का विकास, नियमित क्षमता निर्माण (Capacity Building) कार्यक्रमों का आयोजन, सतत व्यावसायिक विकास (Continuous Professional Development) तथा डिजिटल नवाचार को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन समय की आवश्यकता है।

समग्रतः साहित्य समीक्षा यह सिद्ध करती है कि शिक्षक प्रशिक्षकों का सकारात्मक दृष्टिकोण, पर्याप्त तकनीकी दक्षता, संस्थागत सहयोग तथा सुदृढ़ डिजिटल अवसंरचना, कंप्यूटर आधारित शिक्षण की सफलता के मूल आधार हैं। यदि शिक्षक शिक्षा संस्थानों में इन सभी घटकों का समन्वित विकास किया जाए, तो शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया अधिक प्रभावी, समावेशी, विद्यार्थी-केंद्रित, प्रौद्योगिकी-सक्षम तथा गुणवत्तापूर्ण बन सकती है। यही वर्तमान अध्ययन का प्रमुख निष्कर्ष एवं विश्लेषणात्मक आधार है।

 

10. सुझाव

साहित्य समीक्षा के आधार पर निम्नलिखित प्रमुख सुझाव प्रस्तुत किए जाते हैं—

  1. सभी शिक्षक प्रशिक्षकों के लिए नियमित ICT एवं डिजिटल शिक्षण प्रशिक्षण आयोजित किया जाए।
  2. प्रत्येक शिक्षक शिक्षा संस्थान में स्मार्ट कक्षाएँ, कंप्यूटर प्रयोगशालाएँ एवं डिजिटल पुस्तकालय विकसित किए जाएँ।
  3. शिक्षक प्रशिक्षकों को डिजिटल शिक्षण सामग्री (E-content) निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।
  4. शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में ई-लर्निंग एवं ब्लेंडेड लर्निंग को व्यापक रूप से अपनाया जाए।
  5. ऑनलाइन एवं कंप्यूटर आधारित मूल्यांकन प्रणाली को प्रोत्साहित किया जाए।
  6. सभी संस्थानों में उच्च गति इंटरनेट एवं पर्याप्त तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
  7. शिक्षकों के मार्गदर्शन हेतु तकनीकी सहायता केंद्र (Technical Support Centre) स्थापित किए जाएँ।
  8. शिक्षक शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), वर्चुअल लैब तथा अन्य उभरती शैक्षिक तकनीकों का समावेश किया जाए।

11. निष्कर्ष

प्रस्तुत समीक्षात्मक अध्ययन से स्पष्ट होता है कि शिक्षण एवं अधिगम प्रक्रिया में कंप्यूटर तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का प्रभावी उपयोग शिक्षक प्रशिक्षकों के दृष्टिकोण, डिजिटल दक्षता, तकनीकी प्रशिक्षण तथा संस्थागत सहयोग पर निर्भर करता है। साहित्य समीक्षा से यह निष्कर्ष प्राप्त हुआ कि अधिकांश शिक्षक प्रशिक्षक कंप्यूटर आधारित शिक्षण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं तथा इसे शिक्षण की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की सहभागिता, स्व-अधिगम, रचनात्मकता एवं शिक्षण की प्रभावशीलता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हैं। अध्ययन से यह भी स्पष्ट हुआ कि पर्याप्त डिजिटल अवसंरचना, उच्च गति इंटरनेट, तकनीकी सहायता तथा नियमित ICT प्रशिक्षण उपलब्ध होने पर कंप्यूटर आधारित शिक्षण का प्रभाव अधिक सफल एवं परिणामोन्मुखी होता है। इसके विपरीत, तकनीकी संसाधनों की कमी, डिजिटल दक्षता का अभाव, अपर्याप्त प्रशिक्षण, संस्थागत सहयोग की कमी तथा डिजिटल विभाजन इसके प्रभावी क्रियान्वयन में प्रमुख बाधाएँ हैं। अतः शिक्षक शिक्षा संस्थानों में आधुनिक डिजिटल अवसंरचना का विकास, शिक्षक प्रशिक्षकों के लिए सतत व्यावसायिक विकास एवं ICT प्रशिक्षण कार्यक्रमों का नियमित आयोजन तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एवं अन्य उभरती शैक्षिक तकनीकों का समावेश आवश्यक है। इससे शिक्षक प्रशिक्षकों की तकनीकी क्षमता सुदृढ़ होगी और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया अधिक प्रभावी, नवाचारपरक, समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण बन सकेगी। साथ ही, यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों की प्राप्ति तथा भविष्य की डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

 

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