सत्याग्रह और महात्मा गांधी (एक विष्लेषणात्मक अध्ययन)

Authors

  • डॉ. दीपक देव असिस्टेंट प्रोफेसर (राजनीति विज्ञान विभाग), राजकीय महाविद्यालय गोवर्धन, मथुरा (उ.प्र.) Author

DOI:

https://doi.org/10.29070/p8yt4g69

Keywords:

महात्मा गांधी, सत्याग्रह, निष्क्रिय प्रतिरोध, रचनात्मक कार्यक्रम, असहयोग, सविनय अवज्ञा, हड़ताल, बहिष्कार, धरना, उपवास

Abstract

साहित्यिक दृष्टि से सत्याग्रह एक संयुक्त शब्द है - जो सत्य + आग्रह शब्द से मिलकर बना है।’

गांधी ने अपने सम्पूर्ण जीवन को ‘सत्य के साथ प्रयोगों की संज्ञा दी । आधुनिक विश्‍व के इतिहास में संभवतः वे एकमात्र ऐसे विचारक हैं, जिन्होंने व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक जीवन के दोनों क्षेत्रों में समान रूप से ‘सत्य को कर्म की कसौटी माना । उनके लिए सत्य न तो पूर्ण रूप से अमूर्त है न ही मात्र भौतिक एवं तत्कालीन वस्तुस्थिति द्वारा परिसीमित। उनकी दृष्टि में सत्य एक स्तर पर शाश्‍वत जीवन मूल्यों का पर्याय है तथा दूसरे स्तर पर सामाजिक, सामयिक, वैयक्तिक और राजनीतिक सरोकारों को समझने का अर्थपूर्ण माध्यम सत्याग्रह के माध्यम से गांधी ने हिंसक जगत को अहिंसा की शिक्षा दी।

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Published

2025-10-01

How to Cite

[1]
“सत्याग्रह और महात्मा गांधी (एक विष्लेषणात्मक अध्ययन)”, JASRAE, vol. 22, no. 5, pp. 25–30, Oct. 2025, doi: 10.29070/p8yt4g69.