सतत विकास लक्ष्य 17 और नागरिक समृद्धि: एक समीक्षा

Authors

  • सोनम सैन रिसर्च स्कॉलर (राजनीति विज्ञान), डॉ. के.एन. मोदी यूनिवर्सिटी, नेवाई , टोंक, राजस्थान Author
  • डॉ. शैलेंद्र मौर्य एसोसिएट प्रोफेसर (राजनीति विज्ञान), सामाजिक अध्ययन संकाय, डॉ. के. एन. मोदी यूनिवर्सिटी, नेवाई , टोंक, राजस्थान Author

DOI:

https://doi.org/10.29070/qzrn7c65

Keywords:

ईमानदारी, सतत विकास, SDG-17, नीतिगत समन्वय, राजनीति

Abstract

सतत विकास वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख प्राथमिकता बन गया है, जो आर्थिक विकास, सामाजिक समानता और पर्यावरण संरक्षण को एकीकृत करता है। संयुक्त राष्ट्र के 2030 एजेंडा के अंतर्गत 17 सतत विकास लक्ष्य (SDGs) निर्धारित किए गए, जिनका उद्देश्य देशों को समावेशी और संतुलित विकास की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करना है। इन लक्ष्यों में SDG-17 विशेष रूप से साझेदारी, सहयोग और संस्थागत समन्वय पर जोर देता है, जो अन्य सभी लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रमुख प्रेरक तत्व माने जाते हैं। यह समीक्षा शोधपत्र सतत विकास की अवधारणात्मक नींव का विश्लेषण करता है और SDG-17 के संदर्भ में राजनीतिक प्रणालियों, शासन संरचनाओं और नागरिक समृद्धि के बीच संबंधों का अध्ययन करता है। अध्ययन यह दर्शाता है कि प्रभावी शासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और सहभागी राजनीतिक प्रणालियाँ समानतापूर्ण विकास तथा नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके साथ ही, यह शोध राजनीतिक संकेतकों—जैसे विकेंद्रीकरण, संस्थागत क्षमता, नीतिगत समन्वय और जनभागीदारी—की भूमिका पर भी चर्चा करता है, जो सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की गति को तेज करने में सहायक होते हैं। अध्ययन के निष्कर्ष यह रेखांकित करते हैं कि नागरिक समृद्धि केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह समावेशी शासन, संस्थागत ईमानदारी और समन्वित नीतिगत क्रियान्वयन का परिणाम भी है। इसलिए दीर्घकालिक सतत विकास और वैश्विक प्रगति सुनिश्चित करने के लिए साझेदारियों और शासन तंत्र को सुदृढ़ बनाना अत्यंत आवश्यक है।

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Published

2026-01-01

How to Cite

[1]
“सतत विकास लक्ष्य 17 और नागरिक समृद्धि: एक समीक्षा”, JASRAE, vol. 23, no. 1, pp. 1107–1114, Jan. 2026, doi: 10.29070/qzrn7c65.