जम्मू-कश्मीर: भारत की अखंडता, सामरिक गहराई और भू-राजनीतिक शक्ति का बहुआयामी विश्लेषण

Authors

  • डॉ. सचिन तिवारी प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग, ज्ञानवीर विश्वविद्यालय, सागर (मध्य प्रदेश) Author

DOI:

https://doi.org/10.29070/abg0rg24

Keywords:

जम्मू-कश्मीर, अनुच्छेद 370, भू-राजनीति, CPEC, जल-राजनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा

Abstract

यह शोध-पत्र जम्मू-कश्मीर के ऐतिहासिक, सामरिक, संवैधानिक और आर्थिक आयामों का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन में हृदय स्थल सिद्धांत, जल-राजनीति, चीन-पाकिस्तान कारक, तथा 2019 के बाद के प्रशासनिक और विकासात्मक परिवर्तनों का मूल्यांकन किया गया है।  जम्मू-कश्मीर केवल एक सीमावर्ती क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और सभ्यतागत निरंतरता का केंद्रीय स्तंभ है।

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Published

2026-01-01

How to Cite

[1]
“जम्मू-कश्मीर: भारत की अखंडता, सामरिक गहराई और भू-राजनीतिक शक्ति का बहुआयामी विश्लेषण”, JASRAE, vol. 23, no. 1, pp. 765–771, Jan. 2026, doi: 10.29070/abg0rg24.