काशी की समकालीन काष्ठ परम्परा एवं कलाकार

Authors

  • प्रशान्त कुमार विश्वकर्मा रिसर्च स्कॉलर, एकलव्य विश्वविद्यालय, दमोह, म.प्र. Author
  • डॉ. सरिता पाण्डेय सहायक प्रोफेसर, ललित कला विभाग, एकलव्य विश्वविद्यालय, दमोह, म.प्र. Author

DOI:

https://doi.org/10.29070/6tkxzg51

Keywords:

काशी, काष्ठ कला, लकड़ी नक्काशी, समकालीन कलाकार, बनारस, लोक शिल्प, दृश्य संस्कृति

Abstract

काशी भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का एक बहुत प्राचीन और जीवंत केंद्र है, जहाँ आज भी कई दृश्य कला, शिल्प, संगीत, वस्त्र और अनुष्ठानिक रूपों की परंपराएँ सक्रिय हैं। इन परंपराओं में काष्ठकला एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। काशी की काष्ठ परम्परा केवल उपयोगितावादी वस्तुओं तक सीमित नहीं है; यह घरेलू सज्जा, मंदिर स्थापत्य, धार्मिक वेदियों, अनुष्ठानिक संरचनाओं, लोक खिलौनों और सजावटी वस्तुओं में भी व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। वर्तमान में, यह परंपरा नए रूपों में विकसित हुई है, जैसे Decorative Wall Panels, Miniature Ghats, Temple Sculptures, Interior Craft Items, Laser-Assisted Carving और Souvenir Art।

वर्तमान शोध-पत्र में काशी की समकालीन काष्ठ परम्परा का इतिहासिक विकास, तकनीक, कलाकार समुदाय, आधुनिक बाजार, पर्यटन, शैक्षिक प्रशिक्षण और वर्तमान चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि काशी की काष्ठ कला आज एक मजबूत सांस्कृतिक पहचान बन गई है जो परंपरा और नवाचार को संतुलित करती है।

Downloads

Download data is not yet available.

References

1. अग्रवाल, वासुदेवशरण. (1965). भारतीय लोक कला. वाराणसी: भारतीय विद्या प्रकाशन।

2. तिवारी, गोपाल. (1991). काष्ठ कला और लोक रूप. लखनऊ: हिंदी संस्थान।

3. उपाध्याय, कृष्णदेव. (1980). काशी की सांस्कृतिक परंपरा. वाराणसी: विश्वविद्यालय प्रकाशन।

4. दास, रायकृष्ण. (1970). काशी की कला परंपरा. वाराणसी: नागरी प्रचारिणी सभा।

Downloads

Published

2026-01-01

How to Cite

[1]
“काशी की समकालीन काष्ठ परम्परा एवं कलाकार”, JASRAE, vol. 23, no. 1, pp. 751–754, Jan. 2026, doi: 10.29070/6tkxzg51.