पर्यावरण संरक्षण एवं गांधीवादी दृष्टिकोण
DOI:
https://doi.org/10.29070/mfer8q53Keywords:
पर्यावरण, पर्यावरण संरक्षण, पर्यावरणवादी, वैश्विक, जैविक-अजैविक घटक, ग्लोबल वार्मिंग, सतत विकास, आधुनिकीकरण, औद्योगिकीकरण, लोककल्याणकारी, राजनीतिक विश्लेषण, वैश्वीकरण, उदारीकरण, निजीकरण, पर्यावरणीय संरक्षण, पारिस्थितिकी, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत, वैदिक संस्कृतिAbstract
पर्यावरण राजनीतिक विश्लेषण में एक नये सामाजिक सरोकार के नवीन मुद्दे के रूप में 1970 के दशक के बाद से अध्ययन में जुङा। 1970 के दशक के आते-आते औद्योगिकीरण की होङ के परिणामस्वरूप भौतिक एवं जैवकीय पर्यावरण क्षरण, पर्यावरण प्रदूषण, पर्यावरण संरक्षण की समस्याऐं उभरने लगी। परिणामस्वरूप पर्यावरण एक अन्र्तविषयी एवं बहुमुखी समस्या के रूप में उभर कर आने लगा जिसने राजनीतिक क्षेत्र में स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर चिन्तन, मनन एवं कर्म की दिशा प्रशस्त की। पर्यावरण के अन्र्तगत सभी जैविक व अजैविक घटकों का समावेश है। पर्यावरण हमारे जीवन का आधार है। इसलिए पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। पर्यावरण संरक्षण का अर्थ है कि प्रकृति और उसके संसाधनों, जैसे हवा, पानी, जंगल, जीव-जंतु आदि की रक्षा करना, ताकि जीवन संतुलित और सुरक्षित बना रहे। किंतु आधुनिक विकास की अंधी दौड़ ने पर्यावरण को गंभीर संकट में डाल दिया है। ऐसे समय में पर्यावरण की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक हो जाती है। पर्यावरण की सुरक्षा के संदर्भ में महात्मा गांधी का दृष्टिकोण अत्यंत प्रासंगिक है।
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