शिवहर जिले में भूमि उपयोग परिवर्तन एवं कृषि विकास: एक साहित्य-समीक्षा आधारित विश्लेषणात्मक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.29070/50qbb375Keywords:
भूमि उपयोग परिवर्तन, कृषि विकास, शिवहर, बाढ़-भेद्यता, जनसंख्या घनत्व, जोत विखंडन, GIS/रिमोट सेंसिंगAbstract
भूमि उपयोग परिवर्तन तथा कृषि विकास के मध्य अंतर्संबंध विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जटिल एवं बहु-आयामी हो जाता है, जो उच्च जनसंख्या घनत्व, लघु जोत आकार तथा आवर्ती बाढ़ जैसी प्राकृतिक चुनौतियों से एक साथ जूझ रहे हों - जैसा कि बिहार राज्य के शिवहर जिले में देखा जाता है। प्रस्तुत समीक्षा-पत्र का उद्देश्य भूमि उपयोग परिवर्तन एवं कृषि विकास से संबंधित विद्यमान सैद्धांतिक तथा अनुभवजन्य साहित्य का व्यवस्थित संश्लेषण प्रस्तुत करना है, जिसमें इस परिघटना के अध्ययन हेतु साहित्य में प्रयुक्त प्रमुख चरों - यथा जनांकिकीय, भूमि-उपयोग, कृषि-आर्थिक, प्राकृतिक तथा संस्थागत चर - को व्यवस्थित रूप से वर्गीकृत एवं विश्लेषित किया गया है। समीक्षा में वॉन थ्यूनेन के कृषि अवस्थिति सिद्धांत से लेकर समकालीन उपग्रह-आधारित भूमि-उपयोग परिवर्तन अध्ययनों तक के साहित्य को सम्मिलित किया गया है, तथा भारत, बिहार एवं विशेष रूप से उत्तर बिहार क्षेत्र से संबंधित अध्ययनों पर विशेष बल दिया गया है। समीक्षा से यह स्पष्ट होता है कि यद्यपि जनसंख्या वृद्धि, सिंचाई विस्तार, भूमि विखंडन तथा बाढ़-भेद्यता जैसे चर पृथक-पृथक रूप से भली-भाँति अध्ययित हैं, तथापि शिवहर जैसे अत्यंत लघु, बाढ़-प्रवण उत्तर बिहार जिलों में इन चरों को एक एकीकृत भौगोलिक ढाँचे में समाहित करने वाला कोई समर्पित अध्ययन उपलब्ध नहीं है। इस समीक्षा के आधार पर एक प्रस्तावित संकल्पनात्मक ढाँचा प्रस्तुत किया गया है, जो भावी अनुभवजन्य शोध हेतु दिशा-निर्देश प्रदान करता है। पत्र का समापन विद्यमान साहित्य में पहचाने गए शोध-अंतरालों तथा भावी शोध की दिशाओं के विवेचन के साथ किया गया है।
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