हिंदी भाषा की ध्वन्यात्मक, रूपात्मक एवं वाक्यगत विशेषताओं का भाषावैज्ञानिक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.29070/2z3p0n64Keywords:
हिंदी ध्वनि-व्यवस्था, चतुष्क, अकार-लोप, परसर्ग, कारक-रचना, कर्म-वाच्यमूलकता, अन्विति, संयुक्त क्रिया, भारतीय भाषा-क्षेत्रAbstract
प्रस्तुत शोध-पत्र हिंदी भाषा की संरचना का व्यवस्थित वर्णनात्मक विश्लेषण तीन स्तरों पर प्रस्तुत करता है—ध्वन्यात्मक, रूपात्मक एवं वाक्यगत। ध्वनि-स्तर पर हिंदी की स्वर-व्यवस्था, चतुष्क-आधारित व्यंजन-व्यवस्था, मूर्धन्य ध्वनियों की उपस्थिति, नुक्ता-ध्वनियों का समावेश तथा शब्दांत अकार-लोप जैसी विशिष्ट प्रवृत्तियों का परीक्षण किया गया है। रूप-स्तर पर द्वि-लिंगीय एवं द्वि-वचनीय संज्ञा-व्यवस्था, त्रि-रूपीय कारक-रचना, परसर्ग-प्रणाली, सर्वनामों में त्रिस्तरीय आदर-भेद तथा क्रिया की काल-पक्ष-वृत्ति व्यवस्था एवं संयुक्त क्रिया-रचना का विवेचन प्रस्तुत है। वाक्य-स्तर पर कर्ता-कर्म-क्रिया पदक्रम, विशेषण एवं संबंधबोधक की पूर्ववर्ती स्थिति, अन्विति के तीन प्रकार, कर्म-वाच्यमूलक "ने" रचना, पूर्वकालिक क्रिया-प्रत्यय तथा सापेक्ष-नित्यसंबंधी उपवाक्य-संरचना का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में यह प्रतिपादित किया गया है कि हिंदी की अनेक विशेषताएँ उसे न केवल भारतीय आर्यभाषा परिवार का प्रतिनिधि बनाती हैं, अपितु उसे उस व्यापक "भारतीय भाषा-क्षेत्र" का अंग भी सिद्ध करती हैं जिसकी संकल्पना एम. बी. एमेनो ने प्रस्तुत की थी। विश्लेषण केलॉग, मैकग्रेगर, ओहाला, मासिका एवं शापिरो के वर्णनात्मक अध्ययनों तथा कामताप्रसाद गुरु एवं किशोरीदास वाजपेयी की व्याकरणिक परंपरा के आलोक में प्रस्तुत किया गया है।
Downloads
References
1. केलॉग, एस. एच. (1938). हिंदी भाषा का व्याकरण (तीसरा संस्करण). लंदन: केगन पॉल, ट्रेंच, ट्रूबनर एंड कंपनी।
2. बट, एम. (1995). उर्दू में जटिल विधेय की संरचना। स्टैनफोर्ड: सीएसएलआई प्रकाशन।
3. ब्लोच, जे. (1965). वेदों से आधुनिक काल तक इंडो-आर्यन (ए. मास्टर, अनुवादक)। पेरिस: एड्रियन-मैसनन्यूव।
4. ओहाला, एम. (1983). हिंदी ध्वनिविज्ञान के पहलू। दिल्ली: मोतीलाल बनारसीदास।
5. एमेन्यू, एम. बी. (1956). "भारत एक भाषाई क्षेत्र के रूप में।" भाषा, 32(1), 3–16।
6. मैकग्रेगर, आर. एस. (1995). हिंदी व्याकरण की रूपरेखा (तीसरा संस्करण)। ऑक्सफोर्ड: क्लेरेंडन प्रेस।
7. कॉमरी, बी. (1989)। भाषा सार्वभौमिक और भाषाई टाइपोलॉजी (दूसरा संस्करण)। शिकागो: शिकागो विश्वविद्यालय प्रेस.
8. शापिरो, एम.सी. (1989)। आधुनिक मानक हिंदी का एक प्राइमर। दिल्ली: मोतीलाल बनारसीदास.
9. मैसिका, सी.पी. (1991)। इंडो-आर्यन भाषाएँ। कैम्ब्रिज: कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस।
10. कचरू, वाई. (2006)। हिंदी. एम्स्टर्डम: जॉन बेंजामिन पब्लिशिंग कंपनी।
11. मोंटौट, ए. (2004)। हिंदी का एक व्याकरण. म्यूनिख: लिनकॉम यूरोपा।
12. कार्डोना, जी., और जैन, डी. (सं.) (2003)। इंडो-आर्यन भाषाएँ। लंदन: रूटलेज.
13. गुरु, कामताप्रसाद (1920). हिंदी व्याकरण. वाराणसी: नागरी प्रचारिणी सभा.
14. वाजपेयी, किशोरीदास (1957). हिंदी शब्दानुशासन. वाराणसी: नागरी प्रचारिणी सभा.
15. तिवारी, भोलानाथ (1966). भाषाविज्ञान. इलाहाबाद: किताब महल.






