पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानवदर्शन: आधुनिक अभिशासन का एक भारतीय मॉडल

Authors

  • डॉ. अशोक कुमार महला सहायक आचार्य, राजनीति विज्ञान, राजकीय कला महाविद्यालय, सीकर (राज.) Author
  • डॉ. केशर सिहं शेखावत सहायक आचार्य, लोकप्रशासन, राजकीय कला महाविद्यालय, सीकर (राज.) Author

DOI:

https://doi.org/10.29070/539bqx72

Keywords:

एकात्म मानवदर्शन, अंत्योदय, अभिशासन, धर्म-राज्य, स्वदेशी, विकेंद्रीकृत अभिशासन, मिशन कर्मयोगी, कर्तव्य-बोध, लोक सेवा मूल्य, सामाजिक परिवर्तन, नागरिक सहभागिता, सार्वजनिक नीति, क्षमता निर्माण, जन-आकांक्षाएँ, प्रशासनिक दक्षता, नीति क्रियान्वयन, सतत विकास

Abstract

प्रस्तुत शोध-पत्र लोक प्रशासन और अभिशासन की कार्यप्रणाली में पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित ‘एकात्म मानवदर्शन’ के अनुप्रयुक्त योगदान का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। 20वीं शताब्दी के औपनिवेशिक, पूँजीवादी और समाजवादी प्रशासनिक मॉडलों से इतर, एकात्म मानवदर्शन व्यक्ति, समाज, प्रकृति और राज्य के बीच एक संतुलित, गैर-द्वंद्ववादी व परस्पर-संबद्ध संबंध का प्रस्ताव रखता है। यह अध्ययन अभिशासन के केंद्र में ‘अंतिम जन’ (अंत्योदय) को स्थापित करते हुए अधिकार-केंद्रित प्रशासनिक व्यवस्था के स्थान पर कर्तव्य-आधारित, मूल्य-निष्ठ और समाज-सापेक्ष शासन व्यवस्था का गहन विश्लेषण करता है। शोध की मौलिकता और प्रासंगिकता इस बात में निहित है कि यह इस भारतीय दर्शन को समकालीन प्रशासनिक सुधारों-विशेष रूप से क्षमता निर्माण कार्यक्रम ‘मिशन कर्मयोगी’, नीति आयोग के ‘आकांक्षी जिला कार्यक्रम’, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण तथा विकेंद्रीकृत स्थानीय अभिशासन के सामाजिक प्रभावों के साथ एकीकृत करता है। अध्ययन यह प्रतिपादित करता है कि एकात्म मानवदर्शन केवल एक अमूर्त विचार न होकर आधुनिक सुशासन, पर्यावरण-सम्मत विकास और समाज-केंद्रित लोक प्रशासन का अनिवार्य सैद्धांतिक व कार्यात्मक स्तंभ है।

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Published

2026-06-01

How to Cite

[1]
“पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानवदर्शन: आधुनिक अभिशासन का एक भारतीय मॉडल”, JASRAE, vol. 23, no. 3, pp. 697–704, June 2026, doi: 10.29070/539bqx72.