राजभाषा हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन की भाषाई एवं प्रशासनिक चुनौतियाँ

Authors

  • डॉ. अरविन्द सिंह तेजावत सहायक आचार्य, हिंदी विभाग, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़, हरियाणा Author

DOI:

https://doi.org/10.29070/y4nnx295

Keywords:

राजभाषा अधिनियम 1963, राजभाषा नियम 1976, पारिभाषिक शब्दावली, अनुवादजन्य हिंदी, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, क-ख-ग क्षेत्र, भाषा-नियोजन, प्रशासनिक हिंदी

Abstract

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 द्वारा हिंदी को संघ की राजभाषा का दर्जा प्राप्त हुए सात दशक से अधिक व्यतीत हो चुके हैं, तथापि उसका व्यावहारिक क्रियान्वयन अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच सका है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य इस अंतराल के कारणों का व्यवस्थित विश्लेषण प्रस्तुत करना है। अध्ययन में क्रियान्वयन की बाधाओं को दो व्यापक वर्गों में विभाजित किया गया है—भाषाई एवं प्रशासनिक। भाषाई चुनौतियों के अंतर्गत अनुवाद-केंद्रित कार्य-पद्धति से उत्पन्न कृत्रिमता, अत्यधिक संस्कृतनिष्ठ पारिभाषिक शब्दावली की दुर्बोधता, शब्दावली-निर्माण में एकरूपता का अभाव, मानक वर्तनी की अनिश्चितता तथा विधिक एवं तकनीकी हिंदी की अपर्याप्तता का परीक्षण किया गया है। प्रशासनिक चुनौतियों के अंतर्गत अंग्रेज़ी-केंद्रित कार्य-संस्कृति, प्रशिक्षण-तंत्र की सीमाएँ, मात्रात्मक लक्ष्यों पर अत्यधिक निर्भरता, प्रोत्साहन-योजनाओं की सीमित प्रभावशीलता, "ग" क्षेत्र में क्रियान्वयन का असंतुलन तथा तकनीकी अवसंरचना की कमियों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में यह प्रतिपादित किया गया है कि मूल समस्या विधिक ढाँचे की अपर्याप्तता नहीं, अपितु मूल्यांकन-पद्धति का दोष है—अनुपालन को दस्तावेज़ों की संख्या से मापा जाता है, उपयोगकर्ता की बोधगम्यता से नहीं। अंत में बहु-स्तरीय नीतिगत सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं।

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Published

2026-07-01

How to Cite

[1]
“राजभाषा हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन की भाषाई एवं प्रशासनिक चुनौतियाँ”, JASRAE, vol. 23, no. 4, pp. 13–25, July 2026, doi: 10.29070/y4nnx295.