विकसित होता नैतिक परिदृश्य: समकालीन महिलाओं की लघु कथाओं में नारीवादी नैतिकता का अध्ययन

Authors

  • शाइनी जोस एस आर शोधार्थी, सनराइज़ यूनिवर्सिटी, अलवर, राजस्थान Author
  • डॉ. राजीव कुमार ओझा प्रोफ़ेसर, हिंदी विभाग, सनराइज़ यूनिवर्सिटी, अलवर, राजस्थान Author

DOI:

https://doi.org/10.29070/dqrn9v09

Keywords:

नैतिक, नारीवादी नैतिकता, महिलाएँ

Abstract

समकालीन महिलाओं की लघुकथाएँ समाज की बदलती नैतिकता और नारीवादी दृष्टिकोण को व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम बन गई हैं। इस अध्ययन का उद्देश्य विकसित होते नैतिक परिदृश्य में नारीवादी नैतिकता की भूमिका का विश्लेषण करना है। नारीवाद ने महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए नए दृष्टिकोण प्रस्तुत किए हैं और लघुकथाएँ इस विचारधारा को चित्रित करने का एक प्रभावी तरीका हैं। महिलाओं की लघुकथाओं में व्यक्त नारीवादी नैतिकता पारंपरिक समाज के नियमों, मान्यताओं और स्वीकार्यताओं को चुनौती देती है। यह अध्ययन यह समझने की कोशिश करेगा कि समकालीन महिला लेखिकाएँ अपने उपन्यासों के माध्यम से समाज के नैतिक परिदृश्यों को किस तरह नए तरीके से प्रस्तुत करती हैं और उनके लेखन में नारीवादी दृष्टिकोण ने नैतिक मान्यताओं की किस तरह से पुनर्व्याख्या की है। यह अध्ययन भारतीय समाज में नारीवाद और नैतिकता के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा। साथ ही, यह भी दिखाया जाएगा कि समकालीन महिला लेखिकाएँ अपनी लघुकथाओं में महिलाओं के अधिकारों, उनकी स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को किस तरह प्राथमिकता देती हैं। यह अध्ययन नारीवादी नैतिकता के उन पहलुओं को सामने लाएगा जो महिलाओं के जीवन में बदलाव के लिए प्रेरक शक्ति के रूप में कार्य करते हैं।

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Published

2026-07-01

How to Cite

[1]
“विकसित होता नैतिक परिदृश्य: समकालीन महिलाओं की लघु कथाओं में नारीवादी नैतिकता का अध्ययन”, JASRAE, vol. 23, no. 4, pp. 37–44, July 2026, doi: 10.29070/dqrn9v09.