लोकतांत्रिक प्रशासन और नागरिक असंतोष: नागरिक अभिव्यक्ति और प्रशासनिक दायित्वों का एक संतुलित विश्लेषण

Authors

  • डॉ. अशोक कुमार महला सहायक आचार्य, राजनीति विज्ञान, राजकीय कला महाविद्यालय, सीकर (राज.) Author
  • डॉ. केशर सिहं शेखावत सहायक आचार्य, लोकप्रशासन, राजकीय कला महाविद्यालय, सीकर (राज.) Author

DOI:

https://doi.org/10.29070/3efcgt26

Keywords:

लोकतांत्रिक प्रशासन, नागरिक असंतोष, सार्वजनिक व्यवस्था प्रबंधन, सहानुभूतिपूर्ण जन-प्रबंधन’, प्रशासनिक जवाबदेही, सुशासन, संस्थागत पारदर्शिता, नीतिगत संवाद, जन-प्रबंधन, अनुपातिकता का सिद्धांत, ई-गवर्नेंस

Abstract

प्रस्तुत शोध लेख लोकतांत्रिक सुशासन के ढांचे के भीतर नागरिक असंतोष, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक व्यवस्था प्रबंधन के मध्य प्रशासनिक संतुलन का गहन अध्ययन करता है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के संदर्भ में, यह आलेख लोक प्रशासन की दोहरी जिम्मेदारी का विश्लेषण करता है, एक ओर जहाँ संविधान प्रदत्त नागरिक अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक सुरक्षा, राष्ट्रीय हित और सामान्य जनजीवन की सुचारुता बनाए रखना राज्य का प्राथमिक कर्तव्य है। यह लेख सिद्ध करता है कि आधुनिक ई-गवर्नेंस, पूर्व-संवादात्मक प्रणाली, पारदर्शी, सूचना-प्रसारण तथा अनुपातिक बल-प्रयोग के माध्यम से प्रशासन ने जन-असंतोष का प्रभावी प्रबंधन किया है। अंततः, यह लेख स्थापित करता है कि प्रशासनिक संवेदनशीलता और संस्थागत जवाबदेही नागरिक असंतोष को सुशासन और नीतिगत सुधार के सकारात्मक माध्यम में रूपांतरित कर सकती है।

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Published

2026-07-01

How to Cite

[1]
“लोकतांत्रिक प्रशासन और नागरिक असंतोष: नागरिक अभिव्यक्ति और प्रशासनिक दायित्वों का एक संतुलित विश्लेषण”, JASRAE, vol. 23, no. 4, pp. 86–95, July 2026, doi: 10.29070/3efcgt26.