[1]
“जयशंकर प्रसाद की ऐतिहासिक दृष्टि और उनका साहित्यिक योगदान: एक आलोचनात्मक अध्ययन”, JASRAE, vol. 23, no. 3, pp. 681–686, June 2026, doi: 10.29070/9d2hr012.