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डॉ. हरिशरण वर्मा के नाटकों में सामाजिक युगबोध | Original Article

Nisha Kumari*, in Journal of Advances and Scholarly Researches in Allied Education | Multidisciplinary Academic Research

ABSTRACT:

सामाजिक युगबोध की अर्थ एंव परिभाषा को समझने से पहले हमें युगबोध का अर्थ समझ लेना चाहिए। युग+बोध यह दो शब्दो के मेल से बना है कुछ तो मानते है की पूर्ण शब्द का अर्थ एक ही है लेकिन यह शब्द एक दूसरे के पूरक होते हूए एक-दुसरे से भिन्न है जैसे युग शब्द का अर्थ यदि पाश्चात्य या अंग्रेजी मे देखा जाए तो टाईम, पीरियड़ तथा ‘एंज’ कहा जाता है अंग्रेजी साहित्य में किसी साहित्य प्रवृति के बने रहने तक के टाईम को ‘एज’ कहा जाता है। “युग काल- प्रभाव का एक भाग है जो किसी न किसी रूप में जुड़ा है। आचार्य रामचन्द्र वर्मा के कोष में भी यही अर्थ है”1- इसका अर्थ ‘बृहस्पति’ का एक राशि में स्थिर रहने को पंचवर्शीय काल भी होता है।