‘चीफ की दावत’ कहानी की आधुनिक युग के सन्दर्भ में समीक्षा
चीफ की दावत: एक आधुनिक युग की समीक्षा
Keywords:
चीफ की दावत, भीष्म साहनी, समाज, व्यंग्य, शिक्षित युवा, माता पिता, समर्पित, बलिदान, स्वार्थी बेटा, विधवाAbstract
चीफ की दावत’ भीष्म साहनी द्वारा रचित प्रमुख कहानी है। इस कहानी में उन्होने मध्यमवर्गीय समाज के खोखलेपन तथा दिखावटीपन को दर्शाया है। उनके द्वारा रचित कहानी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। जितनी उस समय थी। भीष्म साहनी ने शामनाथ के माध्यम से शिक्षित युवा पीढ़ी पर करारा व्यंग्य किया है। आज के शिक्षित युवा वर्ग अपने माता पिता को बोझ समझते हैं। व्यक्ति अपनी सुख सुविधा के लिए अपने माता पिता को छोड़ देते हैं। वे यह तक भूल जाते हैं कि आज जिस समाज मे तुम रह रहे हो उनकी बदौलत है। अपने बच्चो को काबिल बनाने के लिए माता पिता अपना सर्वस्व समर्पित कर देते हैं। उनका पूरा जीवन अपने बच्चों की खुशी के लिए बलिदान में व्यतीत हो जाता है। ‘चीफ की दावत’ एक ऐसी ही कहानी है, जिसमें स्वार्थी बेटे शामनाथ को अपनी विधवा बूढ़ी माँ का बलिदान फर्ज ही नजर आता है।Downloads
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Published
2019-02-01
Issue
Section
Articles
How to Cite
[1]
“‘चीफ की दावत’ कहानी की आधुनिक युग के सन्दर्भ में समीक्षा: चीफ की दावत: एक आधुनिक युग की समीक्षा”, JASRAE, vol. 16, no. 2, pp. 486–489, Feb. 2019, Accessed: Feb. 19, 2026. [Online]. Available: https://ignited.in/index.php/jasrae/article/view/10158






