उदयभानु हंस जी की गजलों में प्रेम भावना

An exploration of love sentiments in the ghazals of Udaybhanu Hans

Authors

  • Sumit . Author

Keywords:

उदयभानु हंस, गजलों, प्रेम भावना, संवेदना, काव्य, मनुष्य, बेबसी, निराशा, कुण्ठा, भय, रूचि, जादुई शक्ति, मासूम सा सुंदर, सम्मोहक संसार, प्रेमनिष्ठ संवेदना, जीवन

Abstract

उदयभानु हंस जी की गजलों में प्रेम संबंधी संवेदना स्वाभाविक है। किसी भी वस्तु के प्रति आकर्षित होना मानव मन की सहज प्रक्रिय है, जो प्रेम में बदल जाती है। प्रत्येक कवि इसे अपने काव्य में उतारता है। उदयभानु हंस जी ने भी इसे अपने काव्य में उकेरा है। वैसे तो समकालीन कवियों ने मनुष्य के बेबसी, निराशा, कुण्ठा, और भय आदि को वर्णित किया है लेकिन काव्य में पाठक की रूचि को बढ़ाने के लिए प्रेम को अपने काव्य में समाहित किया है। कविता की जादुई शक्ति से कवि अपनी कविताओं में एक मासूम सा सुंदर और सम्मोहक संसार रचते हैं। जिसमें प्रेमनिष्ठ संवेदना को स्थान मिला है। उन्होंने जीवन को अपने आप में सुंदर बताया है।

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Published

2019-03-01

How to Cite

[1]
“उदयभानु हंस जी की गजलों में प्रेम भावना: An exploration of love sentiments in the ghazals of Udaybhanu Hans”, JASRAE, vol. 16, no. 4, pp. 545–547, Mar. 2019, Accessed: Mar. 13, 2026. [Online]. Available: https://ignited.in/index.php/jasrae/article/view/10500