प्राचीन भारत में भूमिदान: उद्भव एवं विकास

धार्मिक कृत्य के माध्यम से सामाजिक सुधार

Authors

  • Sushila Devi Author

Keywords:

भूमिदान, प्राचीन भारत, धार्मिक कृत्य, दान, सामाजिक-आर्थिक समस्याओं

Abstract

प्राचीन भारतीय समाज में पुण्यप्रद धार्मिक कृत्य के रूप में दान का विशिष्ट स्थान रहा है, जिसकी परम्परा ऋग्वैदिक काल से लेकर आज तक चलती आ रही है। यद्यपि दान को मूलतः धार्मिक व्यवस्था के अन्तर्गत रखा जाता है किन्तु वास्तव में अनेक जटिल सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का निराकरण दान व्यवस्था के माध्यम से प्रतिपादित किया गया। दान की इसी उपादेयता के कारण शास्त्रकारों ने प्रत्येक युग में इसकी महत्ता की चर्चा भिन्न-भिन्न प्रसंगों में की है।

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Published

2019-03-01

How to Cite

[1]
“प्राचीन भारत में भूमिदान: उद्भव एवं विकास: धार्मिक कृत्य के माध्यम से सामाजिक सुधार”, JASRAE, vol. 16, no. 4, pp. 863–867, Mar. 2019, Accessed: Mar. 13, 2026. [Online]. Available: https://ignited.in/index.php/jasrae/article/view/10563