नासिरा शर्मा के उपन्यास ‘बहिश्त’ ज़हरा में नारी की देश के प्रति कर्तव्य-परायणता
नासिरा शर्मा के उपन्यास ‘बहिश्त’ ज़हरा में नारी की देश के प्रति कर्तव्य-परायणता और समाज के प्रति उनकी योगदान स्वरूपता
Keywords:
नासिरा शर्मा, उपन्यास, बहिश्त, नारी, प्रति कर्तव्य-परायणता, हिन्दी, स्वतन्त्र पत्रकारिता, ईरानी समाज, राजनीति, साहित्य कलाAbstract
नासिरा शर्मा हिन्दी की प्रमुख लेखिका हैं। सृजनात्मक लेखन के साथ ही स्वतन्त्र पत्रकारिता में भी उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया है। वह ईरानी समाज और राजनीति के अतिरिक्त साहित्य कला व सांस्कृतिक विषयों की विशेषज्ञ हैं। वर्ष २०१६ का साहित्य अकादमी पुरस्कार उनके उपन्यास पारिजात के लिए दिया जायेगा।Downloads
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Published
2019-04-01
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Section
Articles
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[1]
“नासिरा शर्मा के उपन्यास ‘बहिश्त’ ज़हरा में नारी की देश के प्रति कर्तव्य-परायणता: नासिरा शर्मा के उपन्यास ‘बहिश्त’ ज़हरा में नारी की देश के प्रति कर्तव्य-परायणता और समाज के प्रति उनकी योगदान स्वरूपता”, JASRAE, vol. 16, no. 5, pp. 353–355, Apr. 2019, Accessed: Jan. 20, 2026. [Online]. Available: https://ignited.in/index.php/jasrae/article/view/10917






