किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग का संरचनात्मक एवं कार्यात्मक निरूपण

भारत में कृषि विकास और किसान कल्याण

Authors

  • Krishan Kumar Tiwari Author

Keywords:

किसान कल्याण, कृषि विकास विभाग, निरूपण, कृषि, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, सागर जिले, कार्यक्रम, भारत की स्वतंत्रता, व्यवस्था

Abstract

कृषि की अवधारणाकृषि का अंग्रेजी शब्द Agriculture से लिया गया है जिसकी व्युत्पत्ति लेटिन भाषा के दो शब्दों Agri तथा Culture से हुई हैं इसके अन्तर्गत विद्वानों के अनुसार कृषि के अलावा अन्य कार्य पशुपालन, मुर्गी, मत्स्य, मधुमक्खी पालन भी आते हैं। कृषि को अनेक विद्वानों ने अपने-अपने अनुसार परिभाषित किया है।[1]जिला कृषि कार्यालय की पृष्ठभूमिपूर्व में सन 1948 तक सागर जिले का कृषि कार्य का प्रशासन अतिरिक्त सहायक कृषि संचालक जबलपुर के अधीन रहा बाद में यह प्रभार सागर के जिला कृषि अधिकारी को सौंपा गया। तहसील स्तर पर कृषि सहायक तथा जिला स्तर पर जिला कृषि अधिकारी क्रियान्वित किये गये।[2]सागर विकास कार्यक्रम[3](A)सागर जिले के विकास हेतु सामुदायिक विकास कार्यक्रम - इस हेतु सामुदायिक विकासखण्डों का निर्माण किया गया, जिसका प्रारंभ 2 अक्टूबर 1953 को किया गया।(B)कृषि सुधार कार्यक्रम का क्रियान्वयन - इस हेतु प्रशासन ने सुधरे बीजों का वितरण, रासायनिक खाद वितरण, सन बीजों का वितरण, इमारती वृक्षों का रोपण, लघु सिंचाई साधनों का विस्तार, कम्पोस्ट खाद आदि कार्यक्रम हाथ में लिये।भारत की स्वतंत्रता के पश्चात कृषि विभाग के गठन सम्बन्धी कार्यप्रणाली - भारत की स्वतंत्रता के पश्चात म.प्र. का गठन किया गया, इसके बाद नये तरीके से कृषि विभाग का गठन हुआ, कुछ उद्देश्य निर्धारित किये गये। सन् 2007 में कृषि विभाग का नाम- किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग किया गया। वर्तमान में विभाग का मुख्यालय भोपाल है।[4]म.प्र. शासन में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग का उद्देश्य - प्रमुख उद्देश्य कृषि के क्षेत्र में उन्नति, समग्र विकास प्रशासकीय प्रक्रिया के तहत आयोजित कार्यक्रमों के द्वारा कृषकों को यंत्रीकरण हेतु प्रोत्साहित कर यांत्रिक खेती को बढ़ावा देकर कृषि उत्पादन बढ़ाने, श्रम, समय तथा धन की बचत करना है। कृषि विकास के क्रम में योजनाओं का क्रियान्वयन कर प्रदेश को विकसित राज्य बनाना है।[5]विभागीय ढाँचा (संरनात्मक एवं कार्यात्मक निरूपणआरेखण) - म.प्र. में कृषि विभाग की प्रशासनिक एवं तकनीकी गतिविधियों के संचालन के लिए राज्य स्तर पर संचालनालय जिसके प्रमुख संचालक हैं, से लेकर संभाग स्तर, जिला स्तर, अनुविभाग स्तर तथा विकासखण्ड स्तर तक अधिकारियोंकर्मचारियों को क्रमशः संभाग स्तर पर संयुक्त संचालक, जिला स्तर पर उपसंचालक, अनुविभाग स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी तथा विकासखण्ड स्तर पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाकर अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ संरचनात्मक तथा कार्यात्मक आरेखण किया गया है।[6]

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Published

2019-04-01

How to Cite

[1]
“किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग का संरचनात्मक एवं कार्यात्मक निरूपण: भारत में कृषि विकास और किसान कल्याण”, JASRAE, vol. 16, no. 5, pp. 1897–1900, Apr. 2019, Accessed: Jan. 20, 2026. [Online]. Available: https://ignited.in/index.php/jasrae/article/view/11213