नासिरा शर्मा के उपन्यास ‘पारिजात’ में बिखरते रिश्तों का सच

Exploring the Cultural Unity and Human Relationships in Nasira Sharma's Novel 'Parijat'

Authors

  • Rajni Sharma Author
  • Dr. Gyani Devi Gupta Author

Keywords:

नासिरा शर्मा, उपन्यास, पारिजात, भारत, संस्कृति, मानवीय रिश्ते

Abstract

जब भी दुनिया में सांस्कृतिक एकता के इतिहास की बात होती है तो भारत का जिक्र होना लाजमी ही है। यहां के संस्कारों में दो संस्कृतियां यूं घुली-मिली हैं मानो दोनों एक दूसरे की पूरक हों। पारिजात उपन्यास नासिरा शर्मा की एक ऐसी ही कृति है जो गंगा-जमुनी संस्कृति को परत-दर-परत खोलती और मानवीय रिश्तों की बुनावट को भाषा के एहसासों से पाठक के अंदर जीवंत करती है। पारिजात आज की पीढ़ी के सपनों, उसके निर्णय, माता-पिता के प्रेम, स्त्री की भारतीय और पाश्चात्य छवि के साथ गुरु-शिष्य के संबंधों और एक समुदाय विशेष के प्रति पाश्चात्य पूर्वाग्रह से घायल समाज जैसी संवेदनाओं को एक नए फलक में तर्कों के साथ बयां करता है।

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Published

2019-05-01

How to Cite

[1]
“नासिरा शर्मा के उपन्यास ‘पारिजात’ में बिखरते रिश्तों का सच: Exploring the Cultural Unity and Human Relationships in Nasira Sharma’s Novel ’Parijat’”, JASRAE, vol. 16, no. 6, pp. 215–218, May 2019, Accessed: Apr. 04, 2026. [Online]. Available: https://ignited.in/index.php/jasrae/article/view/11334