भक्ति-साहित्य के सम्राट महाकवि तुलसीदास जी का हिन्दी भक्ति-साहित्य में योगदान
The Contribution of Mahakavi Tulsidas Ji to Bhakti Literature in Hindi
Keywords:
भक्ति-साहित्य, तुलसीदास, हिन्दी, महाकवि, रामबोला, गुरुकुल, राममंत्र, रामकथा, जन्म, दासीAbstract
हिंदी साहित्य के महान कवि संत तुलसीदास का जन्म संवत् 1956 की श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन अभुक्तमूल नक्षत्र में हुआ था। इनके पिता का नाम आतमा रामदुबे व माता का नाम हुलसी था। जन्म के समय तुलसीदास रोये नहीं थे अपितु उनके मुंह से राम शब्द निकला था। साथ ही उनके मुख में 32 दांत थे। ऐसे अद्भुत बालक को देखकर माता−पिता बहुत चिंतित हो गये। माता हुलसी अपने बालक को अनिष्ट की आशंका से दासी के साथ ससुराल भेज आयीं और स्वयं चल बसीं। फिर पांच वर्ष की अवस्था तक दासी ने ही उनका पालन पोषण किया तथा उसी पांचवें वर्ष वह भी चल बसीं। अब यह बालक पूरी तरह से अनाथ हो गया। इस अनाथ बालक पर संतश्री नरहयान्नंद जी की नजर पड़ी उन्होंने बालक का नाम रामबोला रखा और अयोध्या आकर उनकी शिक्षा दीक्षा की व्यवस्था की। बालक बचपन से ही प्रखर बुद्धि का था। गुरुकुल में उनको हर पाठ बड़ी शीघ्रता से ही याद हो जाता था। नरहरि जी ने बालक को राममंत्र की दीक्षा दी और रामकथा सुनाई।Downloads
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Published
2019-05-01
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Section
Articles
How to Cite
[1]
“भक्ति-साहित्य के सम्राट महाकवि तुलसीदास जी का हिन्दी भक्ति-साहित्य में योगदान: The Contribution of Mahakavi Tulsidas Ji to Bhakti Literature in Hindi”, JASRAE, vol. 16, no. 6, pp. 1175–1181, May 2019, Accessed: Apr. 04, 2026. [Online]. Available: https://ignited.in/index.php/jasrae/article/view/11524






