हिंदी काव्य में नारी की बदलती स्थिति
भारतीय साहित्य में नारी की स्थिति का विश्लेषण
Keywords:
हिंदी काव्य, नारी, स्थिति, भारतीय सभ्यता, साहित्यAbstract
साहित्य समाज का दर्पण और दीपक होता है' यह उक्ति जग विख्यात है। साहित्यकार युगीन समाज से प्रभावित होता है और वह साहित्य के बल पर तत्कालीन समाज को भी प्रभावित करता है। नारी भारतीय सभ्यता और साहित्य का केंद्र बिंदु रही है। हिंदी काव्य में नारी की स्थिति हमेशा से एक जैसी नहीं रही उसमें अनेक उतार-चढ़ाव आए हैं।भारतीय संस्कृति में विद्यमान धार्मिक विषमताएं,अंधविश्वासों और निरक्षरता के कारण नारी युगों युगों से उपेक्षित होती रही है।वैदिक काल में नारी को पूजा करने, यज्ञ करने और शिक्षा ग्रहण करने जैसे अनेक अधिकार प्राप्त थे। परंतु आदिकाल तक आते-आते नारी पुरुष की संपत्ति बन कर रह गई। आदिकालीन काव्य से स्पष्ट होता है कि भले ही नारी को स्वयं वर चुनने का अधिकार प्राप्त हो परंतु नारी की स्थिति समाज में इस प्रकार की थी जैसे कोई मदारी कठपुतली को अपनी उंगलियों पर नचाता है उसी प्रकार पुरुष भी जिस प्रकार चाहे नारी का शोषण कर सकता था। नारी एक ओर जहां नाथों की निंदा का पात्र बनी वही सिद्धों ने उसे केवल वासनात्मक दृष्टि से देखा।भक्ति काल में कवियों ने नारी की निंदा और प्रशंसा दोनों की है । संयमशील और मर्यादित नारी को ईश्वरीय अवतार मानते हुए उसको पूजनीय बताया है वहीं भक्ति में बाधा उत्पन्न करने वाली और वासना में लिप्त नारी को संसार के लिए त्याज्य मानते हैं। रामचरितमानस के आदर्श नारी पात्र आज भी संपूर्ण विश्व के लिए प्रेरणा स्रोत है। यशोदा के माध्यम से नारी के माता रूप का जो चित्र सूरदास ने खींचा है वह अपने आप में अनूठा है। रीतिकाल में समाज का प्रत्येक वर्ग विलासिता के रंग में रंगा हुआ था समाज में नर और नारी दोनों का नैतिक पतन हो चुका था। तत्कालीन कवि भी झूठी प्रशंसा और धन प्राप्त करने की ओर उन्मुख थे। उन्हें सामान्य जनजीवन की समस्या से कोई संबंध नहीं था। वे तो केवल कामोत्तेजक काव्य रचकर आश्रयदाताओं को प्रसन्न करने में लगे थे। नारी को केवल भोग्या रूप में देखा। आधुनिक काल तक आते-आते नारी तो केवल पुरुष की पैर की जूती बन कर रह गई। सामाजिक जागृति के कारण नारी की स्थिति में धीरे धीरे बदलाव आने लगा। आधुनिक काल में सती प्रथा जैसी कुछ विसंगतियां खत्म हुई तो कन्या-भ्रूण हत्या और बलात्कार जैसी नारी से संबंधित समस्याओं ने जन्म ले लिया। आधुनिक कवियों ने समाज का नग्न चित्र काव्य में पेश किया है जिससे नारी की दयनीय स्थिति स्पष्ट देखी जा सकती।Downloads
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Published
2019-05-01
Issue
Section
Articles
How to Cite
[1]
“हिंदी काव्य में नारी की बदलती स्थिति: भारतीय साहित्य में नारी की स्थिति का विश्लेषण”, JASRAE, vol. 16, no. 6, pp. 1631–1634, May 2019, Accessed: Apr. 04, 2026. [Online]. Available: https://ignited.in/index.php/jasrae/article/view/11607






