दुष्यंत कुमार के साहित्य में विरह भावना

An examination of the theme of separation in Dushyant Kumar's literature

Authors

  • Maya . Author
  • Dr. Meenu . Author

Keywords:

दुष्यंत कुमार, साहित्य, विरह भावना, श्रृंगार रस, संयोग श्रृंगार, वियोग श्रृंगार, नायक-नायिका, मिलन, विफलता, काव्य शक्ति

Abstract

श्रृंगार रस के दो भेद स्वीकार किए गए हैं-संयोग श्रृंगार या वियोग श्रृंगार। संयोग श्रृंगार में नायक-नायिका के मिलन का चित्रण किया जाता है तथा वियोग श्रृंगार में नायक-नायिका के विरह का चित्रण किया जाता है। इस वियोग श्रृंगार को ही ‘विरह‘ भी कहा जाता है। प्रायः देखा गया है कि प्रत्येक सफल कवि के पीछे प्रेम की विफलता ही काव्य शक्ति के रूप में कार्य करती हैं।

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Published

2019-06-01

How to Cite

[1]
“दुष्यंत कुमार के साहित्य में विरह भावना: An examination of the theme of separation in Dushyant Kumar’s literature”, JASRAE, vol. 16, no. 9, pp. 860–862, June 2019, Accessed: Jan. 09, 2026. [Online]. Available: https://ignited.in/index.php/jasrae/article/view/12315