महिला सशक्तिकरण: आधुनिक भारत की पहचान
भारत में महिला सशक्तिकरण: वर्तमान स्थिति और चुनौतियाँ
Keywords:
महिला सशक्तिकरण, पुरुषों, सामाजिक स्थिति, नारी, अपनी क्षमताएंAbstract
महिला सशक्तिकरण एक निरन्तर बहस का विषय है। पहले के समय में उन्हें पुरुषों के समान दर्जा प्राप्त था। लेकिन उत्तर-वैदिक और महाकाव्य काल के दौरान उन्हें बहुत-सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। कई बार उनके साथ गुलाम जैसा व्यवहार किया जाता था। बीसवीं सदी की शुरुआत (राष्ट्रीय आंदोलन) से भारत में उनकी स्थिति धीरे-धीरे और धीरे-धीरे बदलती गई है। इस संबंध में, हमने ब्रिटिश लोगों के नाम का उल्लेख किया। उसके बाद, भारत की स्वतंत्रता, संवैधानिक निर्माताओं और राष्ट्रीय नेताओं ने दृढ़ता से पुरुषों के साथ महिलाओं की समान सामाजिक स्थिति की मांग की। आज हमने देखा है कि महिलाओं ने लगभग सभी क्षेत्रों में सम्मानजनक पदों पर अधिकार कर लिया है। फिर भी, उनको समाज ने भेदभाव और उत्पीड़न से पूरी तरह मुक्त नहीं किया है। कई महिलाएं अपनी क्षमताएं स्थापित करने में सफल रही हैं। इसलिए प्रत्येक को नारी की सामाजिक व आर्थिक स्थिति को बढ़ावा देने के लिए तत्पर रहना चाहिए।महिला सशक्तिकरण महिलाओं की अपने कार्यों पर पूर्ण नियंत्रण रखने की क्षमता है। इसका अर्थ है भौतिक संपत्ति, बौद्धिक संसाधनों और यहां तक कि उनकी विचारधाराओं पर नियंत्रण। इसमें मनोवैज्ञानिक स्तर पर, महिलाओं की सार्वजनिक जीवन में मुखर होने की क्षमता शामिल है, जो अब तक, विशेष रूप से भारत जैसी संस्कृति में उन्हें सौंपी गई ‘लैंगिक भूमिकाओं‘ से सीमित रही है, और जो परिवर्तनों का विरोध करती है।Downloads
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Published
2022-01-01
Issue
Section
Articles
How to Cite
[1]
“महिला सशक्तिकरण: आधुनिक भारत की पहचान: भारत में महिला सशक्तिकरण: वर्तमान स्थिति और चुनौतियाँ”, JASRAE, vol. 19, no. 1, pp. 227–230, Jan. 2022, Accessed: Jan. 11, 2026. [Online]. Available: https://ignited.in/index.php/jasrae/article/view/13714






