समकालीन भारत के संदर्भ में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की शैक्षिक अवधारणा की एक परीक्षा
उपाध्याय की शैक्षिक अवधारणाओं की जांच एवं प्रयोज्यता
Keywords:
पंडित दीनदयाल उपाध्याय, शैक्षिक अवधारणा, संदर्भ, शिक्षा, भारतीय मूल्यों, शोध विश्लेषण, गुणवत्ता, पहुंच, इक्विटी, चुनौतियाँAbstract
इस अध्ययन का उद्देश्य समकालीन भारत के संदर्भ में एक प्रमुख भारतीय दार्शनिक और राजनीतिक विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रस्तुत शैक्षिक अवधारणाओं की जांच करना है। शिक्षा पर उपाध्याय के विचारों, जैसा कि उनके कार्यों जैसे ष्एकात्म मानववादष् में रेखांकित किया गया है, का भारत के शैक्षिक प्रवचन पर गहरा प्रभाव पड़ा है। उपाध्याय के दर्शन और शिक्षा के बारे में उनकी दृष्टि का एक अवलोकन प्रदान करके अनुसंधान शुरू होता है, जो व्यक्तियों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के साधन के रूप में उनके शारीरिक, बौद्धिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक पहलुओं को शामिल करता है। यह प्राचीन ज्ञान और वैज्ञानिक प्रगति के बीच संतुलन की वकालत करते हुए आधुनिक शिक्षा के साथ पारंपरिक भारतीय मूल्यों के एकीकरण पर उनके जोर की पड़ताल करता है। यह अध्ययन आज के भारत में उपाध्याय की शैक्षिक अवधारणाओं की प्रासंगिकता और प्रयोज्यता की जांच करता है। यह गुणवत्ता, पहुंच और इक्विटी के मुद्दों सहित भारतीय शिक्षा प्रणाली के सामने आने वाली चुनौतियों की जांच करता है। शोध विश्लेषण करता है कि कैसे उपाध्याय के विचार इन चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं और एक अधिक समावेशी और व्यापक शिक्षा प्रणाली के विकास में योगदान कर सकते हैं।Downloads
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Published
2023-01-01
Issue
Section
Articles
How to Cite
[1]
“समकालीन भारत के संदर्भ में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की शैक्षिक अवधारणा की एक परीक्षा: उपाध्याय की शैक्षिक अवधारणाओं की जांच एवं प्रयोज्यता”, JASRAE, vol. 20, no. 1, pp. 229–236, Jan. 2023, Accessed: Jan. 13, 2026. [Online]. Available: https://ignited.in/index.php/jasrae/article/view/14296






