साहित्य की प्रगतिशील परम्परा और रामविलास शर्मा

Exploring the Progressive Tradition of Literature through the Criticism of Ramvilas Sharma

Authors

  • Anand Kumar Yadav Author

Keywords:

रामविलास शर्मा, परम्परा, साहित्य, विचारधारा, आलोचना, समाज, विशेष में, विचारधाराएँ, नयी दिशा, चलती रहती

Abstract

रामविलास शर्मा के पहले आलोचना की कई परम्पराएँ चल रही थीं। एक ही समय में कई परम्पराओं या विचारधाराओं का साथ-साथ चलना अस्वाभाविक नहीं है। इतिहास के काल विशेष में कई प्रकार की विचारधाराएँ एक दूसरे को काटती-पीटती टकराती चलती रहती हैं। नये आलोचक को उनमें से ऐसी परम्परा अन्वेषित करनी पड़ती है जो साहित्य और समाज को नयी दिशा देने में समर्थ हो।

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Published

2012-10-01

How to Cite

[1]
“साहित्य की प्रगतिशील परम्परा और रामविलास शर्मा: Exploring the Progressive Tradition of Literature through the Criticism of Ramvilas Sharma”, JASRAE, vol. 4, no. 8, pp. 1–4, Oct. 2012, Accessed: Jan. 12, 2026. [Online]. Available: https://ignited.in/index.php/jasrae/article/view/4623