साहित्य की प्रगतिशील परम्परा और रामविलास शर्मा
Exploring the Progressive Tradition of Literature through the Criticism of Ramvilas Sharma
Keywords:
रामविलास शर्मा, परम्परा, साहित्य, विचारधारा, आलोचना, समाज, विशेष में, विचारधाराएँ, नयी दिशा, चलती रहतीAbstract
रामविलास शर्मा के पहले आलोचना की कई परम्पराएँ चल रही थीं। एक ही समय में कई परम्पराओं या विचारधाराओं का साथ-साथ चलना अस्वाभाविक नहीं है। इतिहास के काल विशेष में कई प्रकार की विचारधाराएँ एक दूसरे को काटती-पीटती टकराती चलती रहती हैं। नये आलोचक को उनमें से ऐसी परम्परा अन्वेषित करनी पड़ती है जो साहित्य और समाज को नयी दिशा देने में समर्थ हो।Downloads
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Published
2012-10-01
Issue
Section
Articles
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[1]
“साहित्य की प्रगतिशील परम्परा और रामविलास शर्मा: Exploring the Progressive Tradition of Literature through the Criticism of Ramvilas Sharma”, JASRAE, vol. 4, no. 8, pp. 1–4, Oct. 2012, Accessed: Jan. 12, 2026. [Online]. Available: https://ignited.in/index.php/jasrae/article/view/4623






