महिलाओं के विरूद्ध हिंसा एंव मानवाधिकार

Changing Dynamics of Women's Rights and Violence in Indian Society

Authors

  • Narender Kumar Research Scholar, Dept. of Sociology Author
  • Dr. Rakhee P. Kelaskar Author

Keywords:

महिलाओं, विरूद्ध हिंसा, मानवाधिकार, समाज, कानून, संविधान, मौलिक अधिकारों, भारतीय समाज, समान अधिकार, निरन्तर वृद्धि

Abstract

किसी भी समाज में महिला (स्थिति) का अनुमान, उस समाज के कानून (संविधान) में महिलाओं को दिए गए मानव (मौलिक) अधिकारों से लगाया जा सकता है। भारतीय समाज में महिलाओं को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। भारतीय संविधान में महिलाओं को प्रत्येक नजरिए से समान समझा गया है। चाहे वह पारिवारिक स्थिति हो या सामाजिक, व्यक्तिगत हो या सरकारी। प्रत्येक स्थिति में महिलाओं को समान अधिकार दिए गए है। लेकिन पिछले तीन-चार दषकों से महिलाओं के प्रति अपराधों में निरन्तर वृद्धि हो रही है।

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Published

2017-04-01

How to Cite

[1]
“महिलाओं के विरूद्ध हिंसा एंव मानवाधिकार: Changing Dynamics of Women’s Rights and Violence in Indian Society”, JASRAE, vol. 13, no. 1, pp. 259–261, Apr. 2017, Accessed: Jan. 12, 2026. [Online]. Available: https://ignited.in/index.php/jasrae/article/view/6545