रामकृष्णपरमहंसदिव्यचरितम् में करुण रस एक विवेचन
Exploring the Karuna Rasa in the Divine Biography of Ramakrishna Paramahansa
Keywords:
रामकृष्णपरमहंसदिव्यचरितम्, करुण रस, श्री गणेश, भरत, नाट्यशास्त्र, साहित्यिक समीक्षा, रस सिद्धांत, सांगोपांग, विवेचनAbstract
भारत में काव्यलोचना की परम्परा का श्री गणेश यद्यपि वैदिक काल में ही हो गया था तथापि उसकी शास्त्र के रूप में प्रतिष्ठा प्रथमतः भरत के नाट्यशास्त्र में हुई जो इस बात का संकेत करता है कि संस्कृत में साहित्यिक समीक्षा का आरंभ बहुत पहले से हो गया होगा । भरत का नाट्यशास्त्र रस सिद्धांत से न केवल पूर्ण परिचित है अपितु उसका सांगोपांग एवं विस्तृत विवेचन किया है।Downloads
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Published
2018-09-01
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Section
Articles
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[1]
“रामकृष्णपरमहंसदिव्यचरितम् में करुण रस एक विवेचन: Exploring the Karuna Rasa in the Divine Biography of Ramakrishna Paramahansa”, JASRAE, vol. 15, no. 7, pp. 446–449, Sept. 2018, Accessed: Jan. 11, 2026. [Online]. Available: https://ignited.in/index.php/jasrae/article/view/8724






