नेताजी सुभाष चंद्र बोस का भारत की आजादी में योगदान

The Role of Subhash Chandra Bose in India's Freedom Struggle

Authors

  • Dr. Anil Kumar Author

Keywords:

Subhash Chandra Bose, India's Independence, Contribution, Political career, Non-cooperation movement

Abstract

सुभाष चन्द्र बोस ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत देश में चल रहे असहयोग आन्दोलन से की। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता हासिल की। 20 जुलाई, 1921 को उनकीं मुलाकात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से भी हुई। लेकिन, वैचारिक समानता न होने के कारण उन्होंने देशबंधु चितरंजन दास के साथ मिलकर बंगाल आन्दोलन का नेतृत्व किया। सुभाष चन्द्र बोस क्रांतिकारी विचारों के व्यक्ति थे। उनके अन्दर असीम सासह, अनूठे शौर्य और अनूठी संकल्प शक्ति का अनंत प्रवाह विद्यमान था। उन्हें वर्ष 1921 में अपने क्रांतिकारी विचारों और गतिविधियों का संचालन करने के कारण पहली बार छह माह जेल जाना पड़ा। इसके बाद तो जेल यात्राओं, अंग्रेजी अत्याचारों और प्रताड़नाओं को झेलने का सिलसिला चल निकला। स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान उन्हें ग्यारह बार जेल जाना पड़ा। इसके साथ ही उन्हें अंग्रेजी सरकार द्वारा कई बार लंबे समय तक नजरबंद भी रखा गया। लेकिन, सुभाष चन्द्र बोस अपने इरादों से कभी भी टस से मस नहीं हुए। इसके लिए, उन्होंने कई बार अंग्रेजों की आँखों में धूल झोंकी और अंग्रेजी शिकंजे से निकल भागे। 1939 में गान्धीजी से मतभेद के कारण सुभाष चंद्र ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। फिर उन्होंने आजाद हिन्द फौज और फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की। 18 अगस्त 1945 को एक विमान दुर्घटना में नेताजी की रहस्यमयीतरीके से मृत्यु हो गई। इस शोध-पत्र में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के भारत की आजादी में योगदान पर प्रकाश डाला गया है।

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Published

2018-10-01

How to Cite

[1]
“नेताजी सुभाष चंद्र बोस का भारत की आजादी में योगदान: The Role of Subhash Chandra Bose in India’s Freedom Struggle”, JASRAE, vol. 15, no. 9, pp. 658–661, Oct. 2018, Accessed: Jan. 20, 2026. [Online]. Available: https://ignited.in/index.php/jasrae/article/view/8920