भारतीय समाज में वर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति एवं विकास
भारतीय समाज में वर्ण व्यवस्था: संरचना, प्रभाव और धर्मिक ग्रंथों में प्रमाणित प्रभाव
Keywords:
वर्ण व्यवस्था, वर्ण, धर्म, समाज, कर्मAbstract
वर्ण-व्यवस्था हिन्दू धर्म में सामाजिक कार्योन्नती (ऊन्नती) का एक आधार है। हिंदू धर्म-ग्रंथों के अनुसार समाज को चार वर्णों के कार्यो से समाज का स्थाईत्व दिया गया है - ब्राह्मण (शिक्षाविद), क्षत्रिय (सुरक्षाकर्मी), वैश्य (वाणिज्य) और शूद्र (उद्योग व कला) ।इसमे सभी वर्ण को उनके कर्म मे श्रेष्ठ माना गया है।शिक्षा के लिए ब्राह्मण श्रेष्ठ, सुरक्षा करने मे क्षत्रिय श्रेष्ठ, वैश्य व शूद्र उद्योग करने मे श्रेष्ठ। वैश्य व शूद्र वर्ण को बाकी सब वर्ण को पालन करने के लिए राष्ट्र का आधारभूत संरचना उद्योग व कला (कारीगर) करने का प्रावधान इन धर्म ग्रंथो मे किया गया है।Downloads
Download data is not yet available.
Published
2019-01-01
Issue
Section
Articles
How to Cite
[1]
“भारतीय समाज में वर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति एवं विकास: भारतीय समाज में वर्ण व्यवस्था: संरचना, प्रभाव और धर्मिक ग्रंथों में प्रमाणित प्रभाव”, JASRAE, vol. 16, no. 1, pp. 67–70, Jan. 2019, Accessed: May 17, 2026. [Online]. Available: https://ignited.in/index.php/jasrae/article/view/9444






